केंद्र सरकार के द्वारा मांग को मना करने के बाद बिहार राज्य की सरकार अपने राज्य में जातीय जनगणना करवाएगी। इसके बारे में बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बिहार राज्य की विधानसभा में होने वाले शीतकालीन सत्र में विपक्ष दल के नेताओ को इसके बारे में बताया। मुख्यमंत्री ने बोला कि आने वाले दिनों में जब सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी तो जातीय जनगणना का प्रारूप तैयार किया जायेगा। इस बात की जानकारी विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने दी। अब सब इस इंतजार में है की जातीय जनगणना को लेकर क्या फैसला किया जायेगा। इसके लिए सर्वदलीय बैठक का इंतजार हर किसी को है।

लालू के अनुसार नितीश क्यों है मजबूर :-
इस जातीय जनगणना को लेकर सबने बयान दिए है। इनमे से एक है लालू प्रसाद यादव जो कि आरजेडी के अध्यक्ष है। लालू ने कहा कि कुछ भी हो जाये लेकिन जातीय जनगणना जरूर करवाई जाएग। और जैसे कि लालू अभी अपनी तबियत ख़राब होने के चलते एम्स में भर्ती थे , अब वह से डिस्चार्ज हो गए है। ऐसी अटकले लगायी जा रही थी कि इस मामले में लालू नितीश से मिलेंगे , लेकिन लालू ने इस बाद से मन कर दिया।
लालू ने नितीश कुमार को लेकर कहा कि वो होता कौन है , इस जातीय जनगणना को होने से कोई नहीं रोक सकता। किसी में हिम्मत नहीं है कि इस मुद्दे पर कोई इसका विरोध करे। ऐसी कोई पार्टी नहीं है। उन्होंने ये तक कहा कि में काफी टाइम से इसकी मांग उठा रहा हू। लालू के इस बयान से ये बताया कि ये नीतीश कुमार कि मज़बूरी ही है , उन्हें इस जातीय जनगणना को करवाना ही होगा।


तेजस्वी का एजेंडा –
बिहार के विपक्ष के नेता तेजश्वी ने जातीय जनगणना के मामले को लेकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी बात की थी। तेजश्वी यादव ने इस मुद्दे को काफी गंभीरता से ले रखा है और इस बारे में समय समय पर नीतीश कुमार से भी मुलाकात करते है। ये एजेंडा लालू प्रसाद का है और अब तेजश्वी यादव भी इसी को आगे कर रखे है तो ये समझा जा सकता है की लालू और तेजश्वी का एजेंडा एक ही है। नितीश को जातीय जनगणना तो करवानी ही होगी और इसका फायदा लालू प्रसाद जरूर उठाएंगे।