बिहार में नगर पालिका के कानून में सुधार लाने के लिए बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने एक अध्यादेश पारित किया है जिसे अब कानून का रूप देकर लागू किया जाएगा। इस नगरपालिका संशोधन विधेयक 2022 के लागू होने के बाद नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता आ जाएगी। इस अध्यादेश में बताया गया है कि अब कोई भी नगरपालिका का प्रत्याशी किसी भी पार्टी के अंडर रहकर चुनाव नहीं लड़ सकेंगे वह किसी भी सिंबल का प्रयोग नहीं करेंगे।

कानून को बदल दिया गया

इस दौरान नगरपालिका कानून की दो धाराओं में परिवर्तन किया गया है जिनमें से पहली है धारा 23(1), जिसमें प्रावधान था कि पार्षद अपनी पहली बैठक में महापौर और उपमहापौर को चुन सकते हैं लेकिन अब इस संशोधन में इस कानून को बदल दिया गया है तथा जनता सीधे ही अपने पार्षद और उपमहापौर और महापौर को चुनेगी।

दूसरी धारा , धारा 25 है जिसमें यह कानून था कि महापौर और उपमहापौर के खिलाफ एक तिहाई पार्षद अविश्वास का प्रस्ताव पारित कर सकते हैं लेकिन इस कानून संशोधन के बाद यह कानून अब नहीं रहा।

पार्षदों की नहीं चलेगी मनमानी

अब महापौर और उपमहापौर के पदों को हासिल करने के लिए वार्ड पार्षदों की मनमानी नहीं चलेगी पहले यह खबर आती रहती थी कि वार्ड पार्षद अपनी मनमानी करते रहते हैं अब इन पार्षदों की खरीद-फरोख्त पर भी नियंत्रण रहेगा। पहले नगरपालिका कानून 2007 था जिसमें अब संशोधन किया गया है।

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पार्षदों से काफी मोटी रकम वसूली जाती थी

अगर कोई महापौर और उपमहापौर बनता है तो उनको परेशान करने के लिए पहले अविश्वास प्रस्ताव लाकर विकास कार्य को बीच में रोका जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं किया जा सकेगा। महापौर बनने के लिए पार्षदों से काफी मोटी रकम वसूली जाती थी और जिसके बाद में वह महापौर बनने के बाद इस रकम को वापस जुटाने में अपना सारा ध्यान रखते थे और विकास कार्य नहीं कर पाते थे। बिहार के उपमुख्यमंत्री और नगर विकास परिषद के प्रभारी मंत्री तारकीशोर प्रसाद ने भी इस संशोधन अध्यादेश को सही तरीके से अपनाया है।

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उपमुख्यमंत्री ने की तारीफ़

इसकी तारीफ करते हुए उपमुख्यमंत्री कहते हैं कि इस कानून के लागू होने के बाद शहरी निकायों में नगरिया विकास और शहरों के विस्तार के लिए ज्यादा बाधाएं नहीं आएगी तथा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो जाएगी। उपमुख्यमंत्री के अनुसार जब इन लोगों को मतदाताओं द्वारा सीधे चुना जाएगा तो इनकी जवाबदेही ज्यादा हो जाएगी तथा काम करने में पारदर्शिता आएगी और विकास सही तरीके से चलेगा। और इस कानून को सही तरीके से पालन करने के बाद इससे विकास का काम में कोई बाधा नहीं आने वाली