हिंदी दिवस विशेष: हिंदी दिवस मनाने से पहले कुमार विश्वास की टिप्पणी जरुर पढ़ लें

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पटनाः निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटन न हिय के सूल. यह प्रसिद्ध दोहा भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रसिद्ध कविता निज भाषा से लिया गया है. हिन्दी सम्बन्धित आन्दोलनों और आयोजनों में यह दोहा अनगिनत बार प्रेरणास्रोत की तरह उद्धृत किया जाता रहा है. हिन्दी दिवस के मौके पर अगर इस दोहे और भारतेन्दु हरिशचन्द्र जी का उल्लेख न हो नाइंसाफी होगा.

हिन्दी साहित्य के विकास में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का योगदान प्रशंसनीय है. हिंदी दिवस के मौके पर अनायास उनके दोहे लोगों की जुबान पर आ ही जाता है. वर्तमान परिदृश्य में हिंदी साहित्य के जाने-माने कवि और लेखक कुमार विश्वास अपनी रचनाओं को लेकर चर्चा में रहते हैं.

कुमार विश्वास का ट्वीट

हिंदी दिवस के मौके पर डॉ. कुमार विश्वास ने ट्वीट कर भाषा और माता के संदर्भ में उल्लेख किया है. कुमार विश्वास लिखते हैं, भाषाएँ और माताएँ शामियानों से नहीं, बेटे-बेटियों से बड़ी बनती हैं. आगे लिखा, किसी भाषा के सर्जनात्मक जयघोष के लिए समर्पित साधनाएँ, सदैव ही सरकारी प्रयासों से ज़्यादा असरकारी होती हैं. हिन्दी के जयनाद के लिए किंचित् भी चिंतितों के लिए आज इस विचार को आत्मसात् करने का दिन है.

राष्ट्रपति और पीएम ने दी शुभकामनाएं

हिंदी दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी, तमाम मंत्रियों और नेताओं ने बधाई और शुभकामनाएं दी है.

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