‘हर घर नल का जल’ में घपला करने वाले 300 मुखिया पर FIR, ठीकेदार, सुपरवाइजर और पंचायत सचिव भी लाइन में

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पटनाः सीएम नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘हर घर नल का जल’ में घपला करने वालों पर कार्रवाई तेज हो गई है. जमीनी स्तर पर इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में बड़े स्तर पर कई तरह की अनियमितताएं उजागर हुई है. इसमें मुखिया, संवेदक (ठीकेदार), सुपरवाइजर तथा पंचायत सचिव से लेकर कई अफसर तक बेनकाब हुए हैं.

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अनियमितताएं उजागर होने के बाद सरकार एक्शन में आ गई है. अब तक 373 मुखिया पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. जबकि 45 ठीकेदार, 62 सुपरवाइजर, 32 पंचायत सचिव पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जारी किया गया है. घोटाले का खुलासा सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है.

आरटीआई कार्यकर्ता ने किया था खुलासा

बता दें कि नल-जल प्रोजेक्ट में जनप्रतिनिधियों के कारनामे उजागर होते ही सरकार की जमकर किरकिरी हुई. इसे देखते हुए मुख्य सचिव दीपक कुमार ने प्रोजेक्ट में पारदर्शिता लाने और निगरानी करने का निर्देश दिया. वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय द्वारा इकट्ठी की गई जानकारी में बताया गया कि अधिकांश मुखिया पर कमीशनखोरी से लेकर प्रोजेक्ट को पूरा कराने में लेटलतीफी बरतने, काम की गुणवत्ता खराब करने जैसे आरोप हैं.

दोषी मुखिया होंगे बर्खास्त

इस मामले में जांच होने पर आरोप सही पाए गए हैं. ऐसे में दोषी पाए गए तमाम मुखिया को पद मुक्त करने की कार्रवाई होगी. इसके अलावा निगरानी में चूक या लापरवाही करने वाले अफसरों पर भी कार्रवाई होना तय है. वहीं, 13 बीडीओ तथा 10 पंचायत राज पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है.

इन जिलों में मुखिया पर एफआईआर

जिन जिलों में मुखिया पर एफआईआर दर्ज किया गया है उसमें पटना में 12, औरंगाबाद में 9, जहानाबाद में 19, नालंदा में 6, गया में 17, मुजफ्फरपुर में 16, भागलपुर में 13, दरभंगा में 13, मधुबनी में 22, सहरसा में 16, बांका में 17, रोहतास में 15, पूर्वी चंपारण में 12, पश्चिम चंपारण में 9, सिवान में 9, सारण में 5, मुंगेर में 19, समस्तीपुर में 13, सुपौल में 11, मधेपुरा में 17, पूर्णिया में 9, अररिया में 12, भोजपुर में 8, गोपालगंज में 12, शेखपुरा में 8, किशनगंज में 18, कटिहार में 14, बक्सर में 13, वैशाली में 17 और सीतामढ़ी में 12 है.

प्रोजेक्ट में हुई ऐसे अनियमितताएं

जांच के दौरान कई तरह की गड़बडि़यां पकड़ी गई है जिसमें घटिया वाटर टंकी से पानी का रिसाव और टंकी का गिरना, पाइपलाइन बिछाने में मनमानी, 3 फीट के बजाय 1.25 फीट नीचे पाइप बिछाना शामिल है. इसके अलावा खराब पाइप से काम की गुणवत्ता प्रभावित, पसंद के वार्ड और संवेदक को राशि का आवंटन, एडवांस में कमीशनखोरी और काम में लेटलतीफी, प्रशासनिक स्तर पर निगरानी का अभाव, संवेदक से प्रखंड स्तर से अफसरों की सांठगांठ बताया गया है.

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