कृषि कानून पर बीजेपी में दो फाड़, किसानों के समर्थन में उतरे दो बड़े नेताओं ने सरकार के लिए खड़ी की मुश्किल

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ लगातार आंदोलन जारी है. पिछले एक महीने से ज्यादा किसान दिल्ली से सटी सीमाओं पर अपना विरोध जता रहे हैं. इस कानून में त्रुटियों को दूर करने के लिए सरकार ने किसान नेताओं के कई दौर की बातचीत की है लेकिन समाधान नहीं हो पाया है.

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बीजेपी में ही इस कानून को लेकर दो फाड़ होता दिख रहा है. बीजेपी नेता और हरियाणा के पूर्व गृह मंत्री संपत सिंह ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की है. रविवार को केंद्र से आग्रह करते हुए संपत सिंह ने कहा कि वह सोमवार को आंदोलनकारी किसानों के साथ होने वाली बैठक से पहले तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द कर दे.  बीजेपी नेता ने कहा “इन सभी कानून को वापस लिया जाना चाहिए और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर सरकार द्वारा फसलों की खरीद की गारंटी देने वाले एक नए कानून को उनके स्थान पर लाया जाना चाहिए.”

एमएसपी को कानूनी रुप दे सरकार

संपत ने कहा “जब सरकार आश्वासन दे रही है कि एमएसपी जारी रहेगा, तो इसे लेकर कानून क्यों नहीं बना देती. एमएसपी को कानूनी रूप देने से, किसानों को भरोसा हो जाएगा कि वे सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर अपनी फसल बेच सकेंगे.” भाजपा नेता ने कहा, “केंद्र को किसान को विपक्षी दलों की तरह नहीं देखना चाहिए. उन्हें राजनीतिक दल मानना किसानों का अपमान है.”

पीएम मोदी को किया आमंत्रित
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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने भी दिया समर्थन

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बीरेंद्र सिंह ने भी आंदोलनकारी किसानों को अपना समर्थन दिया है.  शुक्रवार को रोहतक के सांपला में किसान नेता छोटू राम की प्रतिमा के पास एक दिवसीय धरना भी दिया. बीजेपी नेता ने कहा, “मैं इस आंदोलन में शामिल हो गया क्योंकि मैं पहले एक किसान हूं और बाद में एक राजनीतिज्ञ हूं. जैसा कि मैं छोटू राम के परिवार का हूं, मेरा पहला कर्तव्य किसानों के साथ खड़ा होना है. मुझे सर छोटू राम विचार मंच के सदस्यों ने किसानों की आवाज उठाने के लिए कहा क्योंकि उन्हें लगता है कि तीन नए कानून उनके लिए हानिकारक हैं.”

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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘सरकार और किसानों को बातचीत जारी रखनी चाहिए और इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए. मैं दिल्ली की सीमा पर विरोध कर रहे किसानों में शामिल होने के लिए तैयार हूं और अगर वे मुझे अनुमति देते हैं तो उनके साथ भूख हड़ताल पर बैठूँगा.” बीरेंद्र ने कहा कि कोई किसानों को नहीं उकसा रहा है, वे अपनी मर्जी से आंदोलन कर रहे हैं.

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