पीएफआई के खिलाफ सूफी इस्लामिक बोर्ड ने खोला मोर्चा, जिहाद और 72 हूरों का लालच देकर युवाओं को किया जा रहा गुमराह

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पटनाः सूफी इस्लामिक बोर्ड पीएफआई पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने के लिए लगातार अभियान चला रही है. इस अभियान के अंतर्गत दानापुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई. जिसमें मुख्य वक्ता सूफी श्राइन बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रभारी संगठन सूफी मोहम्मद कौसर हसन मदनी ने मीडिया को संबोधित किया.

मीडिया को संबोधित करते हुए मदनी ने कहा कि आतंक समर्पित संदिग्ध संस्था पीएफआई के लोग अपनी शाखाओं एसडीपीआई, सीएसआई, इमाम काउंसिल और अन्य सहयोगी संगठनों के द्वारा युवा वर्ग को तथाकथित जिहाद के नाम पर 72 हूरों का लालच दिखा रहे हैं. इसके जरिए इस्लामी साम्राज्य की स्थापना करने का मनगढ़ंत उद्देश्य दर्शा कर युवा वर्ग को गुमराह कर उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.

हाथरस मामले में पीएफआई की भूमिका संदिग्ध

बोर्ड के प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह वही संगठन है जो नागरिकता कानून के विरोध प्रदर्शनों में होने वाली हिंसक घटनाओं में शामिल रहा है. हालिया दिनों में हाथरस मामले में संगठन की भूमिका संदिग्ध रही है. पूर्व में संगठन को झारखंड राज्य में प्रतिबंधित भी किया जा चुका है. यह संगठन मूल तक केरल प्रदेश में बना जिसे तथाकथित जिहादियों की सहायता के लिए बनाया गया है. इसका नेटवर्क कुख्यात बेसिक क्वेश्चन कि आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़ा हुआ है.

देश विरोधी कार्य कर रहा पीएफआई

मोहम्मद कौसर हसन मदनी ने बताया कि पीएफआई के एजेंट लगातार इस संगठन के द्वारा देश और समाज विरोधी कार्य करते हैं. इस संगठन को प्रतिबंधित करने के लिए सूफी इस्लामिक बोर्ड अब तक सैकड़ों पत्र और हजारों पोस्टकार्ड देश के गद्दारों के पास भेज चुका है.

संगठन को प्रतिबंधतित करने तक चलेगा आंदोलन

बोर्ड लगातार देश के नौजवानों खासतौर से मुस्लिम समुदाय के नौजवानों को पीएफआई के चंगुल से बचाने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रही है. इसके लिए भारत के सभी राज्यों के विभिन्न प्रमुख शहरों से बैन पीएफआई अभियान चलाया जा रहा है. मदनी का कहना है कि अभी तो यह प्रारंभ है, जब तक देश की सरकार अलगाववादी संगठन को प्रतिबंधित नहीं करती आंदोलन जारी रहेगा.

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