BMP बना विशेष सशस्त्र पुलिस, डीजीपी-गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव ने दिया विपक्ष के सवाल का एक-एक जवाब

0
26

पटनाः बिहार विधानसभा में जिस कानून को लेकर हंगामा और मारपीट हुई. उसके बाद बिहार विशेष सशस्त्र बिल पर सस्पेंस को खत्म करने के लिए पुलिस की ओर से प्रेस कांफ्रेंस किया गया. प्रेस कांफ्रेंस में डीजीपी एसके सिंघल, बीएमपी के डीजी आर एस भट्ठी, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद समेत कई पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे.

इस दौरान पत्रकारों के सवालों का पुलिस अधिकारियों ने जवाब दिया. डीजीपी एसके सिंघल ने बिल के प्रावधानों को  समझाते हुए कहा कि यह बिल बीएमपी के लिए है. राज्य पुलिस के लिए यह बिल नहीं है. सीआईएसएफ के तर्ज पर बिहार सशस्त्र पुलिस को अधिकार दिया गया है. ऐतिहासिक स्थल पर ही बिना वारंट गिरफ्तारी का आदेश है. बगैर वारंट ऐतिहासिक स्थलों पर तलाशी का अधिकार दिया गया है.

CISF पर निर्भरता होगी कम

इस बिल के बन जाने से बीएमपी और अच्छे तरीके से काम करेगी. केन्द्रीय पुलिस बल पर निर्भरता कम होगी. बिहार एक विकासशील राज्य है. जिसकी सुरक्षा के लिए यह बिल जरूरी है. पारित अधिनियम बीएमपी के लिए है ना कि राज्य पुलिस के लिए है.

सरकार पर विपक्ष है हमलावर

बता दें कि बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस बिल को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है. बजट सत्र के अंतिम दिन आरजेडी के नेतृत्व में  पूरा विपक्ष काफी हंगामा किया था. सदन के अंदर आराजकता का स्थिति उत्पन्न हो गयी थी.विपक्षी विधायकों को जबरन सदन से बाहर किया गया था. काफी हो हंगामे के बाद यह बिल दोनों सदनों से पारित हो पाया.

ये भी पढ़ेंः बिहार विधानसभा में विपक्षी विधायकों की पिटाई के खिलाफ समर्थकों के साथ सड़कों पर उतरेंगे तेजस्वी यादव

अधिनियम का उद्देश्य बिहार सैन्य पुलिस को सीआईएसएफ की तर्ज पर एक बहुदलीय सुरक्षा बल में बदलना है. पटना में आगामी मेट्रो परियोजना सहित विकसित बुनियादी ढांचे की रक्षा करने की आवश्यकता पर विस्तार से बताया. उदाहरण दिए गए हैं जिनमें त्वरित गिरफ्तारी मानव जीवन को बचा सकती है.

विशाल भारद्वाज की रिपोर्ट

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here