मधुबनी नरसंहार के मुख्य आरोपी पर महागठबंधन में दो फाड़, कुख्यात प्रवीण झा के पक्ष में खुल कर उतरे कांग्रेस नेताओं का बड़ा बयान

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पटनाः मधुबनी नरसंहार पर महागठबंधन की दो बड़ी पार्टियों का रूख जुदा है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रवीण झा पर हमलावर हैं वहीं, कांग्रेस उसके बचाव में उतर गई है. पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद कांग्रेस की 6 सदस्यीय टीम बुधवार को पटना लौटी. ऐसे में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री अवधेश सिंह ने प्रवीण झा का बचाव किया.

पूर्व मंत्री अवधेश सिंह का कहना है कि प्रवीण झा खूंखार व्यक्ति नहीं है. उसे भड़काया गया है. कुछ लोगों ने निजी हित के लिए उसे बरगलाया है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार पूरे प्रदेश को जातीय उन्माद में झोंकना चाहती है. सदाकत आश्रम में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अवधेश सिंह ने कहा कि मधुबनी हत्याकांड के पीड़ित परिवार के कब्जे में ही विवादित तालाब था. तालाब की बंदोबस्ती पीड़ित के पक्ष में थी. घटना होने के बाद भी अब तक किसी भी अधिकारी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात तक नहीं की है. मिथिलांचल में इस तरह की घटना की यह शुरुआत है.

पुलिस प्रशासन पर खड़े किये सवाल

अवधेश सिंह ने बताया कि होली के दिन अनुमंडल मुख्यालय से 3 किलोमीटर की दूरी पर हत्याकांड को अंजाम दिया गया. पीड़ित परिवार के लोग पुलिस को फोन पर सूचना दे रहे थे. लेकिन, पुलिस को 3 किमी आने में 4 घंटे समय लग गए. इस घटना के लिए पूरी तरह से प्रशासन जिम्मेदार है. वहीं, इस मामले में पीड़ित परिवार से मुलाकात नहीं करने पर सीएम नीतीश पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इतने बड़े नरसंहार होने के बावजूद CM नहीं पहुंचे हैं. वहीं, सरकार से मृतकों के परिवार को 20-20 लाख रुपया और नौकरी देने की मांग की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंत्री के साथ विधायक आनंद शंकर, पूर्व विधायक मनोज कुमार सिंह और मीडिया प्रभारी राजेश राठौर मौजूद थे.

तेजस्वी के बढ़ते कदम पर अंकुश लगाने की कोशिश!

प्रवीण झा का बचाव करने पर महागठबंध में आरजेडी और कांग्रेस के बीच तलवार खिंच गई है और असहमति की बात दिख रही है. एक तरफ उधर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मधुबनी हत्याकांड को लेकर सीधे सरकार पर निशाना साध रहे हैं. वहीं, नरसंहार में बेरहमी से 5 लोगों की हत्या का आरोप लगने वाले नेता प्रवीण झा को कुख्यात बताने से इनकार करने पर कांग्रेस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या आरजेडी और कांग्रेस में सामन्जस्य की कोई कमी है या फिर तेजस्वी के आक्रमक रवैये पर अंकुश लगाकर पॉलिटिकल एडवांटेज को कम करने की कोशिश.

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