पूर्व मंत्री मेवालाल चौधरी के दर्दनाक मौत पर निजी सहायक ने किया सनसनीखेज खुलासा, सिस्टम ने ले ली जान, DM से पैरवी पर मिला था बेड, पर….

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जेडीयू के विधायक सह पूर्व मंत्री डॉ. मेवालाल चौधरी के निजी सहायक शुभम सिंह ने सनसनीखेज खुलासा किया है. उन्होंने कहा “वह तो पटना आना भी नहीं चाहते थे. समय पर रिपोर्ट नहीं मिली, इलाज नहीं दिखा तो आए. यहां अपनी सरकार का सिस्टम भी झेला, फिर प्राइवेट भी. सत्तारूढ़ दल के विधायक, पूर्व मंत्री…सारी पैरवी के बावजूद विदा हो गए.”

डॉ. मेवालाल चौधरी के निजी सहायक शुभम सिंह ने बताया कि उनकी तबीयत खराब चल रही थी. आशंका होने पर 12 अप्रैल को RT-PCR जांच के लिए मुंगेर में सैंपल दिया जो 13 अप्रैल को सैंपल पटना में रिसीव हुआ और 16 अप्रैल को शाम में PMCH ने उन्हें पॉजिटिव बताया. इसी बीच 15 अप्रैल को उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई और खांसी बहुत बढ़ गई तो उन्होंने रात में पटना निकलने की इच्छा जताई. साढ़े 8 बजे अपनी इंडिवर कार से पटना के लिए रवाना हुए.

पटना लौटते वक्त थे खांसी से परेशान

दिवंगत विधायक के निजी सहायक ने बताया कि उनके साथ ड्राइवर, गार्ड और मैं साथ था. कार में एक ऑक्सीजन सिलेंडर भी रख लियाा गया. रास्ते में उन्हें खूब खांसी हुई. चौधरी लगातार बता रहे थे कि तबीयत ज्यादा बिगड़ रही है, लेकिन रास्ते भर अदरक चबाते हुए आए कि खांसी कम होगी. रात 12.30 बजे पटना पहुंचे, अस्पताल में जाने की बजाय वे 3 स्टैंड रोड स्थित आवास पहुंचे. सांस लेने में कठिनाई होने पर आवास पर ही उन्हें ऑक्सीजन लगाई गई. एक घंटे के बाद उन्होंने ऑक्सीजन हटाने को कहा.

IGIMS से लौटना पड़ा खाली हाथ 

16 अप्रैल की सुबह विधायक 7:45 बजे IGIMS पहुंचे जहां, रैपिड एंडिजन टेस्ट किया गया और उस रिपोर्ट में उन्हें कोरोना निगेटिव बताया गया. जबकि विधायक जी ने खुद कहा कि RT-PCR करा लें. यह जांच भी IGIMS में की गई, लेकिन कहा गया कि जांच की रिपोर्ट 2 दिन बाद आएगी. यहीं नहीं, यह भी कहा गया कि रिपोर्ट आने के बाद भर्ती लिया जाएगा. पद, पहचान, पैरवी…किसी से जगह नहीं मिली.

पारस में DM से पैरवी पर मिला बेड 

शुभ सिंह ने आगे बताया कि विधायक जी का मन नहीं माना. उन्होंने कहा कि मुझे पारस हॉस्पिटल ले चलो. वहां चेस्ट का CT स्कैन कराओ, खांसी कम नहीं हो रही है. CT स्कैन कराकर उसकी रिपोर्ट पारस हॉस्पिटल में ही डॉ. कुमार अभिषेक से दिखाई गई. रिपोर्ट देखते ही उन्होंने ICU में भर्ती करने की सलाह दी, लेकिन ICU में जगह नहीं होने की वजह से इमरजेंसी में ही रखा गया. पटना DM के कहने पर बेड मिला, लेकिन 8-10 घंटे तक ICU का इंतजार ही करते रहे.

सांस लेने में हो रही थी तकलीफ

इस बीच ऑक्सीजन लगातार चलती रही. इससे उन्हें थोड़ी राहत मिली, लेकिन शाम होने पर कहने लगे कि सांस लेने में दिक्कत हो रही है. खांसी भी बढ़ने लगी. रात में 10-11 बजे के बीच उन्हें ICU में जगह मिल पाई, तब इलाज शुरू हुआ. 18 अप्रैल की रात पारस हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने कहा कि वे ठीक से ऑक्सीजन नहीं ले पा रहे हैं इसलिए वेंटिलेटर पर लाना होगा.

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डॉक्टरों ने बताया कि उनके लंग्स ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. इसके लिए परमिशन वाले पेपर पर साइन किया. कोविड मरीज के साथ रहने की अनुमति नहीं थी, इसलिए देर रात मैं वापस आवास पर लौट आया. 19 अप्रैल को सुबह 4 बजे हॉस्पिटल ने कॉल कर बुलाया और मौत की सूचना दी.

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