शहाबुद्दीन के निधन के बाद लालू-तेजस्वी को अब्दुल बारी सिद्दिकी की नसीहत! श्रद्धांजलि देनी है तो…

0
31

पटनाः शहाबुद्दीन के निधन के बाद पार्टी और लालू परिवार के व्यवहार से मुस्लिम नेता खासे आहत हैं. कई नेता लालू-तेजस्वी का साथ छोड़ दिया है. जबकि कई नेता धीरे-धीरे अपना बात सोशल मीडिया में रख रहे हैं. इस बारे में पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे अब्दुल बारी सिद्दिकी नेअपनी बात सोशल साइट फेसबुक पर रखी है.

दिनांक-03 मई, बादे असर मो0 शहाबुद्दीन, पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक दिल्ली शहर के ITO कब्रिस्तान में सुपूर्द-ए-ख़ाक किये गए. वे मर गए या मारे गए यह बहस तब तक चलती रहेगी जबतक उनकी मौत की न्यायिक जाँच नहीं हो जाती है. हालांकि न्यायिक जाँच की किस हद तक सच्चाई तक पहुंच पायेगा यह अभी कहना मुश्किल है फिर भी जब उनके परिवार और उनके शुभचिंतको की मांग है की न्यायिक जाँच करायी जाए तो फिर जाँच नहीं कराना तो संदेह को वर्षो तक बल देता रहेगा.

परिवार के संपर्क में थे सिद्दिकी

मैंने कभी सोचा नहीं था कि जो व्यक्ति कानून के राज में पुलिस कस्टडी में हो, सज़ा काट रहा हो, कानून पर निर्भर हो वो बेहतर इलाज से महरूम कैसे रह जायेगा? मैं लगातार उनके परिवार खास तौर पर उनकी अहलिया हिना शहाब उनके शुभचिंतको के समपर्क में रहा. जैसे-जैसे उनलोगों ने जिनसे भी संपर्क करने को कहा उनसे संपर्क करता रहा. चाहे मुख्यमंत्री, बिहार हो या लालू जी या दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के डॉक्टर, सुपरिटेंडेंट या मीसा भारती, सांसद वगैरह.

एम्स में इलाज की थी जरूरत

दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के डॉ0 रवि पाठक बार-बार कहते रहे की उनके बेहतर इलाज के लिये उन्होंने Higher Institution के लिए अनुशंसा की है. उन्होंने यह भी बताया की DG, Jail ने भी अनुशंसा की है. ऐसा नहीं है की हमारी पार्टी के वरिष्ट नेताओं ने शहाबुद्दीन साहब के अच्छे इलाज हेतु उन्हें AIIMS भेजने के लिए दबाव नहीं बनाया. अस्पताल सूत्रों के द्वारा उनकी तबियत critical होने की बात बतायी गयी. फिर बताया गया कि उनका निधन हो गया.

महीनों से बीमार थे शहाबुद्दीन!

ऐसी स्थिति में उन्हें Higher Institution में नही भेजे जाने का खुलासा तो जेल प्रशासन और गृह विभाग को तो करना ही करना था. ऐसा क्यों नहीं किया गया? शायद जेल प्रशासन द्वारा उनकी मृत्यु के बाद की जो तस्वीर social media पर आयी है उसे देखने से लगता है कि वे महीनों से बीमार हो. मुझे ऐसा बताया गया है कि छोटा राजन जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के नामी अपराधी हैं, AIIMS में इलाजरत हैं तो मो0 शहाबुद्दीन जो सांसद, विधायक रहे को AIIMS में क्यों नहीं? COVID PROTOCOL के नाम पर उन्हें अपने गाँव नहीं भेजा गया तो दूसरों को कैसे?

सोचा नहीं था शहाबुद्दीन की मौत के बारे में 

संविधान ने व्यवस्था की है बिना भेदभाव, राग, द्वेष के कार्य करने का. हम सब जब कभी किसी संवैधानिक पद पर जाते है तो इसकी शपथ भी खाते हैं. मैं फेसबुकीया नहीं हूँ, यदा-कदा कुछ पोस्ट करता हूं. उनकी मौत की खबर एक पहेली की तरह है. कभी खबर चली की उनकी मौत हो गयी फिर उनकी मौत का खंडन की वे इलाजरत है और कुछ घंटों के बाद फिर उनकी मौत. मैंने कभी सोचा नहीं था की ऐसा होगा, मैं स्तब्द्ध हूँ.

ये भी पढ़ेंः ..तो क्या लालू परिवार से बेहद नाराज हैं शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा, सोशल मीडिया ने उड़ाएं तेजस्वी यादव के होश, दी सफाई

मेरा उनसे केवल राजनीतिक रिश्ता नहीं था. उनके दादा मरहूम मेरे नाना मरहूम अमीर-ए-शरियत मौलाना अब्दुर रहमान साहब के मुरीद थे. उनके मामू Judicial Magistrate बेहद ईमानदार मेरे घनिष्ट थे. जो घटनाक्रम है उससे गुस्सा स्वाभाविक है. जब भी पार्टी पर किसी तरह का संकट आया तो शहाबुद्दीन साहब पार्टी के लिए स्तम्भ बनकर खड़े रहे और पार्टी के नेता लालू प्रसाद जी भी उनके लिए.

कुछ महीने पहले फोन पर हुई थी बात

बहुत सारी यादें हैं अभी कुछ महीने पहले कोर्ट के आदेश से परिवार से मिलने दिल्ली में जेल से बाहर पुलिस कस्टडी में आये थे. उन्होंने किसी के मोबाइल से मेरे मोबाइल पर मुझे सम्पर्क किया. बहुत अपने की तरह मेरा हालचाल पूछा. मैंने उनसे पूछा आप कौन बोल रहे है तब उन्होंने अपना नाम बताया. फिर उन्होंने कहा की आऊंगा तो ढेर सारी बातें होंगी. अब वो बातें कभी नहीं होंगी. सिद्दिकी ने सिडनी ओलिंपिक के दौरान ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा की तस्वीर भी शेयर की है.

ये भी पढ़ेंः सिवान में समर्थक से लेकर शहाबुद्दीन की पत्नी का सातवें आसमान पर गुस्सा! आरजेडी विधायक को बिना मिले ही वापस लौटाया

आगे लिखा, मो0 शहाबुद्दीन साहब की मौत से मुझे कभी न पूरा होने वाला छती पहुंचा है. वो मेरे छोटे भाई की तरह थे, जो मेरे अच्छे-बुरे वक्त पर कंधा से कंधा मिलाकर चलते थे. उनके गुज़र जाने से मुझे बेहद गम है. उस गम को अल्फाज़ो से बयान करने के लिए मेरे पास अल्फ़ाज़ नही हैं. पार्टी, पार्टी के नेताओं, उनके शुभचिंतको को उनके परिवार खासतौर पर उनके बच्चों और उनकी पत्नी हिना शहाब के साथ परिवार की तरह दुख-सुख में मज़बूती से खड़ा होना ही सच्ची अक़ीदत श्रद्धांजलि होगी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here