शहाबुद्दीन के इंतकाल के बाद आरजेडी में बगावत के सुर! बड़े मुस्लिम नेता ने कहा- लालू परिवार मुस्लिमों को दे रहा धोखा

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बिहार में अलग-अलग गठबंधन के लिए अलग-अलग वोट बैंक के लिए समीकरण हैं. जहां, एनडीए में बीजेपी अगड़ी, वैश्य और पिछड़ी जातियों में पैठ बना रखी है वहीं, सहयोगी पार्टी जेडीयू पिछड़े एवं अत्यंत पिछड़े ( खासकर लव-कुश समीकरण), दलित, अपसंख्यकों में भी पठ रखती है. जबकि दूसरी तरफ विरोधी पार्टी आरजेडी माय समीकरण(मुस्लिम-यादव) को साधते हुए सियासत में पैठ बनाये हुए है. हालांकि, पूर्व बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन के निधन के बाद इस समीकरण में शामिल मुस्लिमों का गुस्सा पार्टी और लालू परिवार पर फूट पड़ा है.

सिवान के पूर्व सांसद शहाबुद्​दीन के निधन के बाद आरजेडी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व उपाध्यक्ष अफरीदी रहमान ने तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव व उनके परिवार पर सीधे तौर हमला बोला और मुसलमान विरोधी करार दिया है. इस संबंध में उन्होंने बयान जारी कर कहा है कि लालू प्रसाद के परिवार के लिए शहाबुद्दीन ने बहुत कुर्बानी दी, लेकिन उनके परिवार के लोगों ने धोखा दिया. सारे मुस्लिम लोग शोक में डूबा हुआ है और लालू प्रसाद के परिवार बंगाल का रिजल्ट आने पर जश्न मना रहे हैं. अब उनकी सारी सच्चाई सामने आ गई.

सलीम परवेज ने आरजेडी से तोड़ा नाता

बिहार विधान परिषद् के पूर्व सभापति सलीम परवेज ने आरजेडी से नाता तोड़ लिया है. सलीम परवेरज का कहना है कि आरजेडी का सबसे बड़ा वोट बैंक मुस्लिम समाज रहा उसके इतने बड़े नेता को देखने की जरूरत न तेजस्वी यादव ने महसूस की और न मीसा भारती ने. आने वाले समय में मुस्लिम वोट बैंक का टूटना तय है. हमारे साथ छल किया गया है.

आरजेडी नेताओं पर लग रहे गंभीर आरोप

वहीं, राजद के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ प्रदेश सचिव मो. इफ्तेखार उर्फ मोनू ने अपने पार्टी से नाता तोड़ लिया है. मोनू ने मंगलवार को राष्ट्रीय जनता दल के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मो. खालिद अंसारी के नाम एक रेजिग्नेशन लेटर लिखा है. प्रतिपक्ष नेता तेजश्वी यादव समेत राजद के तमाम बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा है कि जब पार्टी की सींचने वाले का नहीं है तो दूसरे की क्या होगी. कहा शोकाकुल परिवार के साथ पार्टी द्वारा उनके निधन पर इग्नोर करना असहनीय है.

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जानकारों का यह भी कहना है कि अफरीदी रहमान इस तरह की सोच रखने वाले अकेले नहीं हैं. वे एक समुदाय और खासकर शहाबुद्दीन का समर्थन करने वाले लोगों की भावना को व्यक्त कर रहे हैं. उनका आक्रोश इस बात को लेकर है कि पूर्व सांसद डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन के कोरोना से निधन होने के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के परिवार से कोई भी देखने तक नहीं गया, जबकि लालू प्रसाद उस वक्त दिल्ली में ही थे.

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