बस कंडक्टर बना कलक्टर, UPSC एग्जाम पास कर लहराया परचम

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इंसान अगर चाह ले तो क्या नहीं कर सकता है। वह वह चाहे तो दशरथ मांझी बनकर पहाड़ का सीना चीर सकता है, तो वह चाहे तो राम बनकर समुद्र पर सेतु बांध लंका विजय कर सकता है।

बेंगलुरु में BMTC बस कंडक्टर मधु एनसी ने अपनी मेहनत से ऐसी चीज़ कर डाली जो कई लोगों के लिए मिसाल बन गई हैं। मधु ने कड़ा परिश्रम कर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा के मेंस एग्ज़ाम को पास कर लिया हैं और अब वह इंटरव्यू देने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

UPSC द्वारा रिजल्ट घोषित होने पर जब मधु ने अपना रोल नंबर देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मधु फ़िलहाल बस कंडक्टर हैं और परिवार में पहली बार स्कूल जाने वाले सदस्य भी हैं। मीडिया से बात करते समय मधु ने बताया कि “मेरे पैरेंट्स को नहीं पता है कि मैंने कौन सी परीक्षा पास की है, लेकिन वो मेरे लिए खुश हैं। मैं अपने परिवार में शिक्षा पाने वाला पहला शख्स हूँ।”

29 वर्षीय मधु ने बीते साल जून में यूपीएससी सिविल सेवा का प्रीलिम्स एग्जाम दिया था, जिसका रिजल्ट अक्टूबर माह में आया था। प्रीलिम्स पास करने के बाद मधु मेंस की तैयारी में जुट गए। मधु ने वैकल्पिक विषयों के लिए पॉलिटिकल साइन्स और इंटरनेशनल रेलेशन्स को चुना था।

गौरतलब है कि मधु ने प्रीलिम्स कन्नड़ भाषा में तो मेंस की परीक्षा अंग्रेजी भाषा में दी थी। मांड्या के मालावल्ली कस्बे के निवासी मधु ने महज 19 साल की उम्र में बतौर कंडक्टर काम करना शुरू कर दिया था। उस समय मधु ने सिर्फ अपनी स्कूली पढ़ाई ही पूरी की थी। मधु ने इसके बाद डिस्टेन्स लर्निंग के जरिये स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की। मधु राजनीति शास्त्र में परास्नातक हैं।

 

“मेरे पैरेंट्स को नहीं पता है कि मैंने कौन सी परीक्षा पास की है, लेकिन वो मेरे लिए खुश हैं। मैंने अपने परिवार में शिक्षा पाने वाला पहला शख्स हूँ।” दिन में आठ घंटे लगातार बाद में खड़े रहकर नौकरी करते हुए मधु इस परीक्षा को पास करने के बाद कंडक्टर की नौकरी छोडना चाहते हैं।

मधु अपनी बॉस सी शिखा की तरह आईएएस अफसर बनना चाहते हैं, जो फिलहाल बीएमटीसी में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। मधु का कहना है कि शिखा ने उन्हे परीक्षा के पहले गाइड किया है और अब वे उन्हे इंटरव्यू के लिए तैयार कर रही हैं। इसके पहले मधु ने साल 2014 में कर्नाटक प्रशासनिक सेवा के लिए परीक्षा दी थी, लेकिन उसमें मधु सफल नहीं हो सके थे। साल 2018 में पहली बार यूपीएससी सिविल सेवा में भी मधु को सफलता नहीं मिल सकी थी, लेकिन अबकी बार मधु की मेहनत रंग लाई है।

 

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