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पटना हाईकोर्ट : भारत में एक खामी की बात हर गली मुहल्ले में होती है, कि यहां की जनता अगर किसी मामले के चक्कर में पड़ जाए तो उन्हें कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते काटते सालों बीत जाते हैं, लेकिन उस मामले की सुनवाई नहीं होती। कई बार तो ऐसा भी देखा जाता है कि किसी व्यक्ति के मरने के बाद कोर्ट में उसे बेगुनाह या मुजरिम साबित किया गया हो।

देश के सभी लोअर कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक बड़ी संख्या में मामलों की फाइलें धूल चख रही हैं। इसका मुख्य कारण है न्यायाधीशों की कमी। इस समस्या को देखते हुए पटना हाई कोर्ट में जजों की संख्या 27 से बढ़कर 35 कर दी गई है। अब पटना हाई कोर्ट में सुनवाई थोड़ी तेज हो सकती है। हालांकि, अभी भी कई पद खाली हैं।

पटना हाइकोर्ट

पटना हाइकोर्ट में न्यायिक सेवा कोटे से सात जजों को नियुक्त किया

केंद्र सरकार ने पटना हाइकोर्ट में न्यायिक सेवा कोटे से सात जजों को नियुक्त किया है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट से एक जज को पटना स्थानांतरित किया गया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गयी है। एक से दो दिनों के भीतर इन सभी आठ लोगों को पटना हाइकोर्ट के जज के रूप में शपथ दिलायी जायेगी।

बता दें कि मुकदमों के अनुपात में जजों की कम संख्या लंबित मामलों का बड़ा कारण है। 2015 तक जजों के कुल 43 स्वीकृत पद थे, जिसे बढ़ाकर 53 किया गया। अभी 53 की जगह केवल 27 जज हैं। अब तक सबसे अधिक 37 जज हुए हैं। चार मई को सुप्रीम कोर्ट की कालेजियम ने न्यायिक सेवा कोटा के सात न्यायिक अधिकारियों की पटना हाइकोर्ट में जज के रूप में नियुक्ति की अनुशंसा की थी। इन जजों के कार्यभार संभाल लेने के बाद से ये संख्या 35 हो जायेगी।

मिली जानकारी के अनुसार पटना हाइकोर्ट में तीन लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें 1.5 लाख आपराधिक और 1.8 लाख सिविल मामले हैं। 17500 क्रिमिनल मामले की ही सुनवाई हो रही है। 600 फर्स्ट अपील और दतनी संख्या में ही सकेंड अपील के मामले लंबित हैं। जजों की कमी के कारण जमानत के मामले की भी सुनवाई समय से नहीं हो पा रही है। कई मामलों की तारीख तो वर्षों बाद मिलती है तो कई मामले बेंच के इंतजार में ही वर्षों लंबित रह जाते हैं।

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