उम्र कैद की सजा काट रहे युवक को बच्चा पैदा करने के लिए मिली पैरोल, जानिए बिहार में कहां का है मामला

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बिहार में पटना हाईकोर्ट के एक फैसले ने सबके हैरान कर दिया है. जेल में बंद बंदियों के हितों की रक्षा, उनके कानूनी अधिकार के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार नालंदा द्वारा नियुक्त जेल विजिटर अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा की सलाह पर दायर याचिका के मद्देनजर पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है. जिसमें बच्चा पैदा करने के लिए पैरोल दी गई है.

दरअसल, एक युवक 2012 से उम्र कैद की सजा काट रहा है. ऐसे में युवक को संतान उत्तपत्ति के लिए पैरोल दी गई है. यह बिहार में अपनी तरह का पहला फैसला है. आजीवन कारावास की सजा काट रहा युवक नालंदा जिले के उत्तरनावां निवासी 26 वर्षीय विक्की शर्मा है. पत्नी रंजीता पटेल ने अधिवक्ता गणेश शर्मा के माध्यम से पटना हाईकोर्ट में संतानोत्पत्ति के लिए पति को पैरोल पर छोड़ने के लिए 2019 में याचिका दाखिल की थी.

बिहार में इस तरह का पहला आदेश

याचिका के आधार पर सजायाफ्ता को इनफर्टिलिटी के लिए पेरोल पर रिहा करने का आदेश पटना उच्च न्यायालय ने  दिया है. कानूनी मामले के जानकारों का कहना है कि बिहार में इनफर्टिलिटी के लिए पेरोल मिलने का यह पहला आदेश है. अभी तक स्वजनों के अंतिम संस्कार, शादी-विवाह जैसे मुद्दे पर बंदियों को पैरोल मिलता रहा है.

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कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए मंडल कारा बिहारशरीफ में बंदियों को संक्रमण से सुरक्षा के लिए जेल विजिटर पैनल के सदस्य अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा के साथ पीएलवीएस शैलेंद्र महतो सभी वार्डों का निरीक्षण करने पहुंचे. उन्होंने बताया कि जेल के सभी वार्डों में नियमित साफ-सफाई की जा रही है. जेल की पाकशाला, अस्पताल की खिड़कियों, दरवाजों व फर्श को नियमित रूप से सेनेटाईज किया जा रहा है. हालांकि मंडल कारा में बंदियों की संख्या क्षमता से बहुत अधिक है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए बंदियों को सफाई से रहने, बराबर साबुन से हाथ धोने, फिजिकल डिस्टेंस का पालन करने व मास्क लगाकर रहने की सलाह दी गई है.

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