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Bakhtiyarpur-Tajpur Bridge : लगभग दस सालों से अंडर कंस्ट्रक्शन पड़े बख्तियारपुर-ताजपुर फोरलेन पुल के निर्माण कार्य को बरसात के बाद तेज गति दी जायेगी। बते दें कि इस पुल का निर्माण कार्य आधा पूरा कर लिया गया है। अब इसे 2024 तक पूरा कर लेने की संभावना है।

मिली जानकारी के अनुसार निर्माण एजेंसी की खराब आर्थिक स्थिति के कारण इस पुल के कंस्ट्रक्शन के काम में देर हुई है। फिलहाल इस मामले में बिहार राज्य पथ विकास निगम (बीएसआरडीसीएल), निर्माण एजेंसी और बैंक के बीच समझौते के लिए हाईकोर्ट के आदेश के इंतजार में है। इसकी अगली सुनवाई 29 जुलाई को है। कोर्ट के आदेश और तीनों पक्षों के बीच आपसी सहमति के बाद बरसात के बाद इस परियोजना का काम फिर से शुरू होगा।

Bakhtiyarpur-Tajpur Bridge

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Bakhtiyarpur-Tajpur Bridge : 2016 में ही पूरा हो जाना चाहिये था

जानकारी के लिये बता दें कि बख्तियारपुर-ताजपुर फोरलेन पुल का निर्माण 2011 में करीब 1602.74 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया था। पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के तहत शुरू इस परियोजना को 2016 में ही पूरा हो जाना चाहिये था, लेकिन पहले भूमि अधिग्रहण और फिर एजेंसी की वित्तीय स्थिति खराब होने के कारण परियोजना तय समय पर पूरी नहीं हो सकी। अब इसकी अनुमानित लागत बढ़ कर करीब 2,875 करोड़ रुपये हो गयी है। इस परियोजना में बनने वाले पुल की लंबाई करीब 5.5 किमी और एप्रोच की लंबाई करीब 45.39 किमी होगी।

बता दें कि इस परियोजना की निर्माण एजेंसी की खराब आर्थिक हालत के बाद बैंक ने भी आर्थिक मदद करने से मना कर दिया था। बाद में इस परियोजना को पथ निर्माण विभाग की रिवाइवल नीति के तहत पूरा करने का निर्णय लिया गया। इस पुल के बचे काम के लिए 1,187 करोड़ रुपये की जरूरत थी। उसमें से करीब 935 करोड़ रुपये की मदद राज्य सरकार ने करने का निर्णय लिया है।

बता दें कि इस पुल के बन जाने से नवादा, मुंगेर या नालंदा से आने वाली गाड़ियों को उत्तर बिहार जाने के लिए पटना आने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे में दक्षिण बिहार से उत्तर बिहार आवागमन में करीब 60 किमी की दूरी कम हो जायेगी। साथ ही जेपी सेतु, महात्मा गांधी सेतु और राजेंद्र सेतु पर गाड़ियों का दबाव कम हो जायेगा। इसके अलावा राजधानी पटना में भी वाहनों का दबाव कम होगा।

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