खबरों के अनुसार नशीले पदार्थो के निषेध के कानून को न मानने के कारण कब्जे में लिए गए वाहनों को अब बहुत काम दाम में बेचा जा रहा है। इसके लिए डिपार्टमेंट के मुख्य सचिव ने जिला मंत्री को एक पत्र लिखा है। अप्रैल 2016 में शराबबन्दी हुई थी। तब से लगभग 55000 साधनो को पकड़ा गया है , जिनमें से 90700 से अधिक वाहनों को बेचा गया है और लगभग 62 करोड़ रुपए राजस्व लाभ के रूप में जमा किये। अब इस लाफ को देखते हुए सभी जिलों के डीएम के पास विभाग ने पत्र भेजा है , और ऐसे वाहनों को नीलम करने को कहा है।


वाहनों के प्रकार कि बात करे तो , विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा दुपहिया वाहन है। विभाग ने कुल 10736 वाहन जब्त किये थे जिनमे से चार पहिया , तीन पहिया और ट्रक जैसे वाहनों कि संख्या काम है (4176 ) , जबकि दुपहिया वाहन 6560 है। और अक्टूबर महीने कि बात करे तो तब तक 2887 वाहन पकड़े थे जिनमे 1630 दुपहिया और 1257 दूसरे प्रकार के वाहन थे।

विभाग के मुख्या सचिव पाठक जी ने पत्र में बताया था कि इन वाहनों कि उच्च कीमतों के कारण लोग इन्हे खरीद नहीं रहे है , इसलिए हमें इनकी कीमतों को काम करने कि जरुरत है। और ये सभी को पता है कि अगर हम बाजार की कीमत पर वाहन बेचेंगे तो इस से अच्छा तो ग्राहक बाजार से ही खरीद लेंगे। उन्होंने बताया कि वाहनों कि नीलामी राजस्व को इकट्ठा करने के लिए नहीं की जाती है , उत्पाद अधिनियम के तहत ये स्पस्ट है की ये प्रक्रिया दंड को आधार मान कर की जाती है। और यह भी बोला गया है कि अगर फिर भी ये न बिके अर्थार्त 3 बार नीलामी के नोटिस और कीमते काम करने के बावजूद भी , तो इन्हे ऐसे ही नीलाम कर दिया जाये जैसे ये है।


पिछले 2 महीने में जब्त कि 125 कारें:-


अक्टूबर नवंबर में विभाग द्वारा लगभग 500 से अधिक ऐसे वाहनों को जब्त किया गया है जो अवैध रूप से शराब की सप्लाई कर रहे थे। इनमे 50 के करीब ट्रक और 125 से अधिक कार और चौपहिया वाहनों को जब्त किया गया। सबसे ज्यादा दुपहिया वाहन है , जो लगभग 300 है , और 50 तिपहिया वाहन है।