पटना: बिहार समेत पूरे देश में इस समय कोरोना वैक्सीनेशन का दूसरा चरण चल रहा है. वैक्सीनेशन के साथ ही लोगों का कोरोना टेस्ट भी किया जा रहा है. बिहार में भी लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है. इसी कड़ी में पिछले महीने जमुई जिले के तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 588 लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया और ये सभी लोग टेस्ट में नेगेटिव निकले.

बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मरीजों के टेस्ट रिपोर्ट के डेटा में बड़े पैमाने पर फर्जी एंट्री की गई है. गड़बड़ियां सरकारी अस्पतालों की कोरोना जांच रिपोर्ट के डेटा में सामने आई है. अस्पतालों में दी गई कोरोना की टेस्ट रिपोर्ट में मरीजों के नाम, नंबर सब की फर्जी एंट्री कर रिपोर्ट दे दी गई.

26 लोगों के रिपोर्ट पर एक ही नंबर 

बताया जा रहा है कि 26 लोगों के रिपोर्ट पर एक ही मोबाइल नंबर लिखा गया है. जो नंबर लिखा गया है वो 100 किलोमीटर दूर शंभूगंज के बांका में रहने वाले एक मजदूर बैजू रजक का है. रजक ने कहा कि मेरा इन लोगों से कोई संबंध नहीं है. साथ ही कहा कि मेरे परिवार में किसी ने भी कोविड का टेस्ट नहीं कराया है.

नाम से लेकर नंबर तक में गड़बड़ी  

मीडिया रिपोर्ट्स में जमुई, शेखपुरा और पटना में छह PHC में 16, 18 और 25 जनवरी को चार्ट में कोरोना टेस्ट के रिकॉर्ड की गई 588 एंट्री की जांच की गई. लेकिन बुनियादी डेटा प्रोटोकॉल के टारगेट को पूरा करने के लिए डेटा एंट्री में फर्जीबाड़ा किया गया. इसमें मोबाइल नंबर से लेकर फर्जी नाम और उम्र की एंट्री तक में गड़बड़ी की गई. कुछ मामलों में उपयोग में नहीं लाई गई टेस्टिंग किटों से मुनाफा कमाने के लिए ये सब किया गया.

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