कोरोना टेस्टिंग घोटाले में अब मनोज झा के निशाने पर सीएम, संसद में कही ये बातें!

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पटना:देश में कोरोनावायरस के मामलों में कमी और टीकाकरण अभियान के बीच बिहार में COVID-19 टेस्टिंग में गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं, जहां स्वास्थ्यकर्मी फर्जी नाम और मोबाइल नंबर के जरिये फर्जी टेस्ट रिपोर्ट तैयार कर रहे थे.एक शख्स ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्यकर्मी उनके यहां से तीन महिलाओं को टेस्ट के लिए लेकर गए थे और बिना कोरोना टेस्ट के ही उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई. बाद में डीएम से शिकायत करने पर जांच कराई गई तो रिपोर्ट निगेटिव निकली.

वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने शुक्रवार को इस मुद्दे को सदन में उठाया और इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उनकी मांग को उचित मानते हुए सभापति वेंकैया नायडू ने भी मामले को गंभीर कह कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से मामले की जांच करवाने का आग्रह किया है.

मनोज झा ने कही ये बातें 

शून्यकाल में आरजेडी नेता मनोज झा ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि दो-तीन दिनों से बिहार में कोरोना वायरस की जांच रिपोर्ट में आंकड़ों में कथित गड़बड़ी होने की खबरें आ रही हैं. उन्होंने कहा ‘‘ये खबरें चिंताजनक हैं. इनमें दावा किया गया है कि कोरोना वायरस की जांच रिपोर्ट में फर्जी डाटा एंट्री की गई हैं. इसकी उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए.’’ मनोज झा ने यह भी कहा ‘‘ इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज पेश करना अनिवार्य बनाया जाना चाहिए.’’

नेता प्रतिपक्ष के निशाने पर सीएम

इसके साथ ही इस मामले पर कल नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सीएम नीतीश पर निशाना साधा था. उन्होंने सीएम नीतीश पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव के साथ मिलकर कोरोना जांच की संख्या को फर्जीवाड़ा कर बढ़ाने का आरोप लगाया. तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा था कि मैंने पहले ही बिहार में कोरोना घोटाले की भविष्यवाणी की थी.

घोटाले को सीएम ने नकारा था 

जब हमने घोटाले का डेटा सार्वजनिक किया था, तो सीएम ने हमेशा की तरह उसे नकार दिया था. मुख्यमंत्री ने आंकड़े नहीं बदलने पर तीन स्वास्थ्य सचिवों का तबादला कर एंटीजेन का वो “अमृत” मंथन किया कि 7 दिनों में प्रतिदिन टेस्ट का आंकड़ा 10 हज़ार से 1 लाख और 25 दिनों में 2 लाख पार करा दिया.

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अरबों के हेर-फेर की बात 

तेजस्वी ने कहा कि बिहार की आत्माविहीन भ्रष्ट नीतीश सरकार के बस में होता तो कोरोना काल में गरीबों की लाशें बेच-बेचकर भी कमाई कर लेते. जांच में यह साफ हो गया है कि सरकारी दावों के विपरीत कोरोना टेस्ट हुए ही नहीं और मनगढ़ंत टेस्टिंग दिखा कर अरबों का हेर-फेर कर दिया गया. साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमारे द्वारा जमीनी सच्चाई से अवगत कराने के बावजूद सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बड़े अहंकार से दावे करते थे कि बिहार में सही टेस्ट हो रहे हैं. टेस्टिंग के झूठे दावों के पीछे का असली खेल अब सामने आया है.

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