पटनाः राजधानी पटना स्थित भाकपा माले के कार्यालय में आज प्रेस कॉन्फ्रेस का आयोजन किया गया जिसमें पोलित ब्यूरो से लेकर पार्टी के विधायक भी मौजूद रहे. इस दौरान पार्टी नेताओं ने कहा कि बिहार विधानसभा में की गई पुलिसिया गुंडागर्दी न केवल विपक्षी विधायकों की प्रतिष्ठा गिराकर उन्हें अपमानित करने का नीतीश कुमार द्वारा संचालित अतिनिंदनीय व्यवहार था. इसके जरिए विधायिका व सदन की गरिमा को गिराया गया.

पोलित ब्यूरो सदस्य राजाराम सिंह ने कहा कि विधायिका के ऊपर पुलिसिया तानाशाही को प्रश्रय देकर तमाम स्थापित लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की धज्जियां उड़ाई गई जिसका उदाहरण इतिहास में कहीं नहीं मिलता. अंग्रेजी हुकूमत में भी शायद ही ऐसा बर्ताव विधायिका के साथ न किया गया हो. नीतीश कुमार ने विधानसभा के अंदर पुलिस के जोर पर काला कानून पास करवाया है जिसकी हर जगह थू- थू हो रही है.

पुलिस के दम पर पास हुआ कानून

माले नेता ने बताया कि संसदीय व्यवस्था में कानूनों पर सर्वसम्मति बनाने की परंपरा रही है विरोध की स्थिति में गहन विचार-विमर्श करवाने अथवा समीक्षा के लिए प्रवर व अन्य समितियों के सुपुर्द कर देने का प्रावधान रहा है. लेकिन सरकार ने आनन-फानन में विधायकों को पुलिस के जरिए सदन से खींचवाकर व लात-घूसों से पीटवाकर बिल पास करवाया, यह लोकतंत्र की जननी को लोकतंत्र की कब्रगाह बनाना नहीं तो और क्या है ?

मोदी के नक्शे कदम पर नीतीश

वहीं, विपक्षी विधायकों का बचाव करते हुए माले नेता ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का घेराव विधायकों का लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसकी आड़ में 23 मार्च को विधानसभा के इतिहास को कलंकित कर दिया गया. यह तानाशाही दरअसल मोदी सरकार द्वारा पूरे देश में थोपी जा रही तानाशाही का विस्तार भर है. नीतीश कुमार भाजपाइयों के ही एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगे हैं . हमने देखा कि कैसे संसद से जबरदस्ती तीन कृषि कानून पास करवाये गए और अब मोदी सरकार दिल्ली सरकार के अधिकारों में कटौती करके तमाम अधिकार एलजी के हाथों में देने को बेचैन है.

तू-तड़ाक की भाषा पर आ गए सीएम

बिहार में नीतीश कुमार ने उस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए पहले सोशल मीडिया को प्रतिबंधित किया, फिर आंदोलनों में शामिल समूहों को नौकरी अथवा ठेका न देने का फरमान जारी किया. बजट सत्र के दौरान माले व विपक्ष के सवालों के सामने असहज रहे मुख्यमंत्री ने तू-तड़ाक की भाषा का इस्तेमाल किया और महज नसीहतें देते रहे.

कृषि कानून के खिलाफ होगा महापंचायत

भाकपा माले ने ऐलान किया है कि तीनों काले कृषि कानूनों व पुलिस राज कानून के खिलाफ बिहार में नए सिरे से आंदोलन संगठित करेगी और पूरे राज्य में अप्रैल महीने में विधानसभा स्तर पर महापंचायत का आयोजन किया जाएगा . माले विधायक दल ने विधानसभा में अपनी कार्रवाइयों व भूमिका पर अपनी समीक्षा भी की.

विधानसभा में उठाये जनहित के मुद्दे

माले नेताओं ने कहा कि 12 विधायकों के साथ माले विधायक दल की भूमिका जनता के बीच चर्चा का विषय बना रहा. जनता से जुड़े सवालों को सदन में मजबूती से उठाया गया लेकिन अधिकांश सवालों का जवाब सरकार के पास था ही नहीं. सदन में आशा, रसोइया, स्कीम वर्कर, अतिथि शिक्षक, आंगनबाड़ी, मदरसा शिक्षक, 19 लाख रोजगार, समान स्कूल प्रणाली, कंप्यूटर शिक्षक, कार्यपालक सहायक आदि तबकों के सवालों को सदन में लगातार उठाया गया. माले विधायकों का दबाव ही था कि सरकार को कुछेक घोषणाएं भी करनी पड़ी.

विधायकों ने भी किया संबोधित

माले विधायक दल ने तय किया है कि इन तबकों के सवालों पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी और इनके बीच संगठन निर्माण को बढ़ाया जाएगा. सभी तबकों के सवालों को लेकर माले विधायक दल ने मंत्रियों व सचिवों से जल्द ही मिलने का फैसला किया है. संवाददाता सम्मेलन को पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य राजाराम सिंह, विधायक दल के नेता महबूब आलम, विधानसभा में पार्टी सचेतक अरूण सिंह, वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, गोपाल रविदास, मनोज मंजिल, सुदामा प्रसाद, अजीत कुशवाहा, अमरजीत कुशवाहा आदि विधायकों ने संबोधित किया.

पटना से विशाल भारद्वाज की रिपोर्ट

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