पटनाः बिहार में पिछले दिनों एक साथ कई सिविल सर्जन का तबादला किया गया. लेकिन जो झोल तबादला में हुआ है जब स्वास्थ्य विभाग का अजीबो गरीब कारनामा सामने आ गया. चिकित्सा पदाधिकारियों के तबादले में मुर्दे को भी सिविल सर्जन बना दिया गया. राज्य में 17 चिकित्सा पदाधिकारियों का तबादला किया गया है जिसमें कई को सिविल सर्जन बनाया गया है.

विभाग के अधिकारियों ने आनन फानन में डॉ रामनारायण राम का भी तबादला कर दिया और शेखपुरा का सिविल सर्जन बना दिया. जबकि विक्रमगंज रोहतास के तत्कालीन चिकित्सा प्रभारी रामनारायण राम का 7 फरवरी को ही निधन हो चुका है वहीं, उनके स्थान पर दूसरे अधिकारी अभी प्रभारी हैं. स्वास्थ्य विभाग को ये भी नहीं पता है कि रामनारायण राम अभी विक्रमगंज पीएचसी के प्रभारी नहीं हैं क्योंकि वो जिंदा ही नहीं हैं लेकिन तबादले में वर्तमान पदस्थापन विक्रमगंज पीएचसी अंकित है.

डॉक्टर भी हैं हैरान

बता दें कि भोजपुर के रहने वाले रामनारायण राम के निधन के बाद अस्पताल कर्मियों की तरफ से 8 फरवरी को विक्रमगंज पीएचसी में शोक सभा का भी आयोजन किया था. इस दौरान सभी डॉक्टरों ने उन्हें श्रद्धाजंलि दी थी.
ऐसा बिहार में पहली बार नहीं हुआ है कि मुर्दे का तबादला किया गया है, बल्कि कई बार मुर्दे को प्रोन्नति देने का भी मामला सामने आया है.

आदेश पत्र पर संयुक्त सचिव का हस्ताक्षर

इस तबादले वाले आदेश पर स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव अनिल कुमार का हस्ताक्षर भी है लेकिन अनिल कुमार ने बिना यह जाने हस्ताक्षर कैसे कर दिया कि रामनारायण राम जिंदा हैं या मुर्दा. अब स्वास्थ्य विभाग के इस कारनामे के बाद जहां सासाराम में सभी हैरान हैं वहीं मृतक अधिकारी के पैतृक जिले के अलावे शेखपुरा में भी डॉक्टरों को समझ में नहीं आ रहा है कि इतनी बड़ी लापरवाही स्वास्थ्य विभाग से कैसे हो सकती है.

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