पटनाः बिहार सरकार अपने हालिया फैसले से विपक्ष के साथ-साथ सोशल वर्करों के निशाने पर आ गई है. पहले सोशल मीडिया पर मंत्री, विधायक, सांसद और सरकारी अधिकारी के खिलाफ लिखने पर एक्शन लेने के लिए पत्र जारी किया तो अब धरना-प्रदर्शन करने वालों पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया है.

बिहार के डीजीपी एसके सिंघल ने एक पत्र जारी किया है जिस पर बवाल मच गया है. डीजीपी की तरफ से जारी किए गए लेटर में स्पष्ट लिखा है कि यदि कोई व्यक्ति विधि-व्यवस्था की स्थिति,विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम इत्यादि मामलों में संलिप्त होकर किसी आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और उसे इस कार्य के लिए पुलिस के द्वारा आरोप पत्रित किया जाता है तो उनके संबंध में चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन में विशिष्ट एवं स्पष्ट रूप से प्रविष्टि की जाए.

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डीजीपी ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि ऐसे व्यक्तियों को गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि उनमें सरकारी नौकरी/सरकारी ठेके आदि नहीं मिल पाएंगे.

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