भागलपुरः कोरोना संक्रमण काल में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पद्म सम्मान की घोषणा कर दी. पद्म सम्मान पाने विभूतियों की लिस्ट में पीरपैंती प्रखंड के डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह का भी नाम शामिल है. जिन्हें समाज एवं चिकित्सीय सेवा में उत्कृष्ठ कार्य करने के लिए पद्मश्री से नवाजा जाएगा.

आईएमए भागलपुर के गॉड फादर कहे जाने वाले डॉक्टर दिलीप गरीबों के लिए भगवान से कम नहीं हैं. उन्होंने गरीब और नि:सहायों को जीवनदान देने के लिए चिकित्सकीय पेशा को अपनाया था. 92 वर्ष के डॉ. दिलीप कुमार सिंह पिछले 68 सालों से अनगिनत गरीबों और लाचार लोगों का मुफ्त में इलाज कर चुके हैं. डॉ. दिलीप सिंह को मोदी सरकार की तरफ से पद्म भूषण देने की जानकारी मिलते ही सिल्क सिटी के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है.

पीएमसीएच से की है पढ़ाई

डॉ दिलीप कुमार सिंह का जन्म बांका जिला में 26 जून 1926 को हुआ था. डॉ दिलीप सिंह ने 1952 में पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डीटीएम एंड एच इंग्लैंड से किया. पढ़ाई खत्म होते ही अमेरिका भी गए. नौकरी के दौरान मन नहीं लगने पर देश में रह कर सेवा करने के जज्बे ने उन्हें वापस इंडिया लौटने के लिए बाध्य कर दिया.

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अमेरिका से वापस लौटे थे डॉ. दिलीप

अमेरिका से लौटने के बाद डॉ. दिलीप सिंह अपने गांव पीरपैैंती लौट कर गरीबों का इलाज करना शुरू कर दिया. बता दें कि उन्होंने उस दौर में इलाज करना शुरू किया था जब छुआछूत जैसी सामाजिक बुराई अपने चरम पर थी. वहीं, पीरपैैंती में न तो सड़क थी और न बिजली. टेलीफोन की सेवा तो दूर की बात थी. गांव से मरीज की सूचना मिलने पर  उसी गांव में जाकर इलाज करते थे. हालात ऐसे भी थे कि कई बार रात होने पर ढिबरी जलाकर भी इलाज किया.

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