पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव में इन दिनों जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वो है भीड़. इन दिनों सभी पार्टियों के नेता ताबड़तोड़ रैली कर जनता से अपने पक्ष में वोट करने की अपील कर रहे हैं,

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भीड़ जुटाने के मामले में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सबको पछाड़ते नजर आ रहे हैं. हालांकि, इस मामले एक और नेता हैं, जो अपने दम पर उनको टक्कर दे रहे हैं.

कुछ दिन पहले तक महागठबंधन के साथी रहे रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा इस बार थर्ड फ्रंट बनाकर एनडीए और महागठबंधन को टक्कर दे रहे हैं. हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा का गठबंधन मायावती की बसपा, ओवैसी की एआईएएम के समेत पांच दलों के साथ है,

उपेंद्र कुशवाहा अब तक अकेले ही प्रचार का कमान संभल रहे थे. लेकिन शुक्रवार को मायावती के साथ भभुआ के अलावा दूसरे जगहों पर जनता को संबोधित किया. वहीं, अब ओवैसी ने भी मैदान संभाल लिया है.

चुनावी सभा में उमड़ रही भीड़

महागठबंधन से अलग होकर नए गठबंधन में सीएम कैंडिडेट घोषित होने के बाद कुशवाहा के सियासी अस्तित्व पर सवाल खड़े होने लगे थे. हालांकि, बदले परस्थितियों में रालोसपा सुप्रीमों ने  न सिर्फ अपने फैसले को सही साबित कर दिखाया है बल्कि बिहार को तीसरा विकल्प भी दिया है,

उपेंद्र कुशवाहा की जनसभाओं में जन सैलाव उमड़ रहा है. जनता उनको शांत चीत होकर सुन रही है. कुशवाहा के साथ अरवल, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, बक्सर भोजपुर जिलों की जनसभाओं में उमड़ी भीड़ ने विरोधी खेमें में हलचल बढ़ा दी है.

चुनाव से पहले टूटी पार्टी

लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए सरकार में मानव संसाधन मंत्रालय में राज्य मंत्री का जिम्मा संभाल रहे उपेंद्र कुशवाहा ने इस्तीफा देकर महागठबधन की तरफ रुख कर गए. उनके इस फैसले से पार्टी में भारी टूट हो गई. कार्यकारी अध्यक्ष नागमणी कुशवाहा, भगवान सिंह कुशवाहा,

सहयोगी सांसद रामकुमार शर्मा से लेकर सहित दोनों विधायक छोड़ कर चले गए. जहां, लोकसभा चुनाव से पहले जेडीयू ने उनकी पार्टी में सेंध लगाई. वहीं, विधानसभा चुनाव से पहले तेजस्वी यादव ने रालोसपा में बड़ी सेंध लगा दी. इससे नाराज कुशवाहा ने तेजस्वी के चेहरे को नकारते हुए तीसरे मोर्चे की तरफ रुख कर गए.

उपेन्द्र कुशवाहा
उपेन्द्र कुशवाहा

मायावती और ओवैसी से गठबंधन

पार्टी में टूट होने के बाद भी उपेंद्र कुशवाहा ने न सिर्फ पार्टी को फिर से संगठित किया बल्कि कम समय अंतराल में चुनाव की तैयारी करते हुए मायावती, ओवैसी से गठबंधन कर एनडीए और महागठबंधन के खिलाफ तीसरा विकल्प जनता को दिया हैं,

वहीं, जमीनी नेताओं को टिकट देने से कार्यकर्ता भी पूरे जोश के साथ चुनावी समर में जुटे हैं. वहीं, कुशवाहा की तरफ से जारी घोषणा पत्र को ‘ वचन पत्र’ का नाम दिया है. उन्‍होंने कहा है कि न 15 साल वाली वो सरकार ना 15 साल वाली ये सरकार अबकी बार शिक्षा  और रोजगार वाली सरकार.

कुशवाहा को शांति से सुन रही भीड़

वहीं, रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के सभाओं में लगातार बढ़ रही भीड़ नये समीकरण की तरफ इशारा कर रहा है. खासकर, इन सभाओं में भीड़ बेहद शांतिपूर्वक पूर्व केंद्रीय मंत्री को सुन रहा है. चुनावी सभा में युवा के साथ महिलाओं की भी भागीदारी देखने को मिल रही है. रालोसपा सुप्रीमों पढ़ाई(गुणवत्तापूर्ण शिक्षा), कमाई(रोजगार), दवाई( स्वास्थ्य सुविधाएं), सिंचाई(किसानों का हितएवं उन्मुखीकरण), कार्रवाई (अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध), सुनवाई (पक्षपात रहित न्याय व्यवस्था) जैसे मुद्दों पर काम करने बात कर रहे हैं.

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