चीन अमेरिका ब्रिटेन और सऊदी अरब के एक फैसले ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में इन सभी 4 देशों ने कार्बन उत्सर्जन को लेकर नेट जीरो के टारगेट को हासिल करने की डेडलाइन तय कर दी है. उनके इस फैसले से भारत पर भी नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन को लेकर दबाव बढ़ गया है. भारत को भी इस मसले पर जल्द से डेडलाइन तय करनी पड़ सकती है।

चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया में कार्बन उत्सर्जन के मामले में तीसरे स्थान पर है.सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हाल ही में घोषणा की है कि साल 2060 तक उनका देश कार्बन उत्सर्जन को लेकर नेट जीरो के टारगेट को हासिल कर लेगा।

ब्रिटेन के ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर होने वाले संयुक्त राष्ट्र के कॉप26 सम्मेलन में भारत का जोर कार्बन उत्सर्जन घटाने पर रहेगा. सम्मेलन 31 अक्तूबर से 12 नवंबर तक होगा, जिसमें दुनिया के 120 देशों के शासन प्रमुख या उनके प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

भारत ने 2030 तक सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा से 4,50,000 मेगावाट का लक्ष्य तय किया है। ऊर्जा में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक लाने का इरादा है ताकि कम कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य हासिल हो सके।

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