बिहार विधानसभा चुनाव 2020 को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है. एनडीए में जहां जेडीयू-एलजेपी के बीच चल रहे शीत युद्ध ने मुश्किल बढ़ा दी है. वहीं, महागठबंधन में भी सीटों के बंटवारा पर आम सहमति नहीं बन पा रही है. दूसरी तरफ आरजेडी वाम दलों के साथ चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है. हालांकि, जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार आगामी बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे.

वाम दल का आरजेडी के साथ गठबंधन

एबीपी न्यूज से खास बातचीत में कन्हैया ने खुलासा करते हुए कहा कि चुनाव नहीं लड़ूंगा लेकिन पार्टी जो जिम्मेदारी तय करेगी वह जरूर करूंगा. कन्हैया ने यह भी साफ किया कि वामपंथी दलों का आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ना तय है और सही समय पर सीटों का एलान हो जाएगा.

सीएए और एनपीआर के खिलाफ सक्रिय रहे कन्हैया

बता दें कि कन्हैया कुमार लोकसभा चुनाव में हार के बाद नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ बिहार भर में कई सभाएं की थी. इन सभाओं में खूब भीड़ उमड़ रही थी. हालांकि कोरोना महामारी के फैलने और लॉकडाउन शुरू होने के बाद कन्हैया की सक्रियता नजर नहीं आ रही थी.

सीएए के खिलाफ प्रोटेस्ट करते कन्हैया कुमार(फाइल फोटो)
         सीएए के खिलाफ प्रोटेस्ट करते कन्हैया कुमार (फाइल फोटो)

दूसरे को चुनाव लड़ाएंगे कन्हैया

सीएए-एनआरसी के खिलाफ अपनी रैलियों की कामयाबी के बावजूद चुनाव से पीछे हटने के सवाल पर कन्हैया ने कहा कि वह आंदोलन किसी को विधायक, मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं था. उसकी कामयाबी यह थी कि बिहार विधानसभा में एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया जबकि बीजेपी वहां सरकार में शामिल है. वहीं, ‘गायब’ हो जाने के सवाल पर कन्हैया ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की मदद में लगे थे. लेकिन इन बातों का सोशल मीडिया पर प्रचार करने से उन्होंने परहेज किया. बेगूसराय से पिछला लोकसभा चुनाव लड़ने वाले कन्हैया ने बताया, “इस बार पार्टी ने तय किया है कि मैं दूसरे लोगों को चुनाव लड़वाऊं”.

तेजस्वी यादव
        नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)
खुद को बचाने की कोशिश

कन्हैया भले ही पार्टी का हवाला दें लेकिन उनके करीबी सूत्र बताते हैं कि बिहार चुनाव में नीतीश कुमार और बीजेपी के सामने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्ष की हालत जगजाहिर है. सूत्रों की मानें तो वैसे भी तेजस्वी कन्हैया की लोकप्रियता को लेकर असहज रहते हैं. इन्हीं वजहों से कन्हैया बिहार विधानसभा चुनाव में नहीं उतर रहे ताकि परिणाम के बाद हार के बहाने के तौर पर उन्हें ना निशाना बनाया जाए.
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