बेटी के सपने के खातिर पहले घर बेचा फिर चाय और पॉलिसियां, अब कोमोलिका ओलंपिक में पदक जीत कर पूरा करेगी पापा का ड्रीम

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कोई पिता अपने बेटी के सपने पूरे करने के लिए सब कुछ लूटा सकता है तो वाकई वो बेटी लकी है. और जब बेटी पिता के सपने को पूरा करने लगे तो पिता अपने सारे गम को भूला जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ है अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज कोमोलिका बारी के साथ. वो अब ओलंपिक में पदक जीतकर पिता का सपना पूरा करना चाहती है.

कोमोलिका बारी बताती हैं कि उनके पिता ने उनके खेल के लिए घर बेच दिया. हालात ऐसे भी बने की पिता को चाय बेचनी पड़ी. घर का खर्च चलना मुश्किल हुआ तो एलआईसी में एजेंट बनकर पॉलिसियां बेचीं. अब समय आ गया है कि पापा का ड्रीम पूरा करने का.

ओलंपिक के लिए पेरिस में साधेंगी निशाना 

कोमोलिका ने कुछ दिन पहले ही देहरादून में संपन्न हुई 41वीं जूनियर रिकर्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर झारखंड को ओवरऑल चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. पश्चिम बंगाल की रहने वाली 18 साल की कोमोलिका वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में जगह पक्की कर चुकी हैं. लैटिन अमेरिका के ग्वाटेमाला में अप्रैल में वर्ल्ड कप होना है. इसके बाद वह जून में ओलंपिक क्वालिफायर के लिए पेरिस में निशाना साधेंगी.

9 साल की उम्र में की करियर की शुरूआत

बता दें कि कोमोलिका ने साल 2012 में आईएसडब्ल्यूपी तीरंदाजी सेंटर से करियर की शुरुआत की. मिनी और सब जूनियर वर्ग में शानदार प्रदर्शन करने के उपरांत 2016 में टाटा आर्चरी एकेडमी में प्रवेश मिला जहां, द्रोणाचार्य पूर्णिमा महतो और धर्मेंद्र तिवारी जैसे दिग्गज प्रशिक्षकों ने तीरंदाजी के गुर सिखा. इन 3 साल में कोमोलिका ने डेढ़ दर्जन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पदक जीते.

झारखंड को विनर बनाने में मुख्य योगदान

कोमोलिका ने 41वीं जूनियर रिकर्व में झारखंड को चैंपियन बनाने में मुख्य भूमिका निभाई. कोमोलिका ने इंडिविजुअल में स्वर्ण पदक, रैंकिंग 70 प्लस 70 मीटर में स्वर्ण पदक, टीम इंवेंट में स्वर्ण पदक और मिक्स्ड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीते.

चाय की दुकान चलाते हैं पिता

कोमोलिका के पिता घनश्याम बारी का कहना है कि बस एक ही सपना है बेटी देश के लिए ओलंपिक पदक जीते और देश का नाम रौशन करे. कोमोलिका की मां लक्ष्मी बारी आंगनबाड़ी सेविका हैं जबकि घनश्याम बारी चाय की दुकान चलाने के साथ-साथ एलआईसी एजेंट का काम करते हैं.

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कोमोलिका बारी ने 2019 में स्पेन की राजधानी मैड्रिड में विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप के रिकर्व कैडेट (अंडर-18) वर्ग के फाइनल में इतिहास रचा था. तब कोमोलिका ने जापान की वाका सोनोडा को हराकर महिला कैडेट रिकर्व श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता था.

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