कोरोना की दूसरी लहर से हालात ज्यादा लगातार खराब होते जा रहे हैं. पिछले 24 घंटों के दौरान 1,68,912 नए केस दर्ज किए गए हैं.  कोरोना से बिगड़ते हालात को संभालने के लिए देश के कई राज्य अपने यहां पूर्ण लॉकडाउन लगाने की वकालत कर रहे हैं, तो कई राज्य लॉकडाउन की बजाए कड़ाई और दवाई के बूते स्थिति को संभालने का दावा कर रहे हैं.

इस हालात में लॉकडाउन को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्री दो भागों में बंटे हुए हैं. सबसे ज्यादा महाराष्ट्र और दिल्ली की हालत खराब है. वहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, गुजरात, बिहार, झारखंड, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है. कोरोना के बढ़ते मामलों से हालात को संभालने के लिए महाराष्ट्र और दिल्ली में लॉकडाउन लगाने लगाये जा सकते हैं. इसके लिए उद्धव और केजरीवाल सरकार ने अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है.

महाराष्ट्र में लॉकडाउ की वकालत

सामना में छपे लेख में महाराष्ट्र की महाअघाड़ी के प्रमुख दल शिवसेना ने राज्य में लॉकडाउन लगाने की बात कही है. सरकार का कहना है कि राज्य में कोरोना से हालत तेजी से बिगड़ रही है और इस पर लॉकडाउन के जरिए ही काबू पाया जा सकता है.

वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में कोरोना के नए केस तेजी से बढ़ रहे हैं. हालत नवंबर जैसी पैदा हो गई है. अस्पतालों में बिस्तरों, वेंटिलेटरों आदि की कमी नहीं है, लेकिन स्थिति को संभालने के लिए लॉकडाउन लगाने का कदम उठाना पड़ सकता है.

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उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात अपने यहां लॉकडाउन लगाने के पक्ष में नहीं हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लॉकडाउन कोई विकल्प नहीं है. हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी कहा कि लॉकडाउन लगाना समस्या का कोई हल नहीं है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनके यहां लॉकडाउन नहीं लगेगा. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भी कहा है कि हम लॉकडाउन नहीं लगाएंगे.

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