पटनाः बिहार की राजनीति में खास पहचान बनाने वाले बाहुबली का नाम तो है राजेश रंजन पर पहचान है पप्पू यादव के नाम से. पप्पू की खास पहचान तब बनी जब वह 1990 में निर्दलीय विधायक बनकर बिहार विधानसभा में पहुंचे.
पप्पू यादव का सियासी सफर आपराधिक मामलों में विवादों से भरा रहा. मारधाड़ से भरपूर. तब बड़े-बड़े दबंग भी पप्पू से टकराने से बचते रहे. हालांकि पप्पू मानते रहे हैं कि सामाजिक अंतरविरोधों के कारण उनकी ऐसी छवि गढ़ दी गयी. मधेपुरा के सिंघेश्वरस्थान विधानसभा की सीट से पहली बार विधायक बनने वाले पप्पू यादव ने बहुत कम वक्त में कोसी बेल्ट के कई जिलों में अपना प्रभाव बढ़ा लिया.
पप्पू ने जेल यात्रा लिखी किताब
पप्पू यादव ने मधेपुरा नहीं बल्कि पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, कटिहार जिलों में अपने समर्थकों का मजबूत नेटवर्क खड़ा कर लिया. मधेपुरा से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने अपनी बिहार से तिहाड़ की यात्रा यानी पटना के बेऊर जेल से लेकर दिल्ली के तिहाड़ जेल में बिताए गए दिनों के अनुभव को विस्तार से एक किताब के तौर पर लिखा है. रंजीत लोकसभा की सदस्य भी रह चुकी हैं. जहां, वो सदन में अपनी वाक क्षमता और अनोखे अंदाज की वजह से फेमस रही हैं.
3 साल तक चली दोस्ती
एक अखबार से बातचीत करते हुए पप्पू यादव ने कहा था, “रंजीत जी को मैं जितना शुक्रिया अदा करूं वो कम है. 3 साल तक हमारी दोस्ती चली, उन्होंने मेरे प्यार को समझा. तमाम संघर्षों में भी वो मेरे साथ थीं. हमारा प्रेम प्रसंग फरवरी 1992 से शुरू हुआ और इसके बाद 1994 में मेरी शादी हुई. वो दौर बेहद संघर्ष से भरा था, उस समय एक-दूसरे से मिलना जुलना भी मुश्किल था, पटना आना-जाना तो बहुत बड़ी बात थी. मैं खुशनसीब हूं कि मुझे बहुत अच्छी पत्नी मिली हैं.”
रंजीत ने ठुकरा दिया था प्रस्ताव
पहली बार पढ़ने पर ऐसा अहसास होता है कि पप्पू के लिए रंजीत का प्यार पाना बेहद आसान रहा होगा, लेकिन ऐसा नहीं था. उन्हें रंजीत रंजन को हासिल करने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े थे. रंजीत ने पहली बार में पप्पू यादव के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. हालांकि, पप्पू यादव ने हार नहीं मानी. उन्होंने रंजीत से इतना तक कह दिया था कि उनके जिंदगी की पहली और आखिरी लड़की वही हैं.
रंजीत के भाई से बढ़ाई नजदीकी
बाहुबली के प्यार की शुरूआत तब हुई जब वह पटना के बांकीपुर जेल में बंद बंद थे, उस दौरान वे अक्सर जेल अधीक्षक के आवास से लगे मैदान में लड़कों को खेलते देखा करते थे. इन्हीं लड़कों में रंजीत के छोटे भाई विक्की भी थे. धीरे-धीरे खेलने वाले लड़कों के साथ-साथ पप्पू यादव की नजदीकी विक्की से बढ़ गई.
पहली नजर में हुआ रंजीत से प्यार
इसी दौरान पप्पू यादव ने विक्की के फैमिली एलबम में टेनिस खेलते हुए रंजीत की तस्वीर देखी. पहली नजर में ही रंजीत की फोटो देख पप्पू उनसे प्यार कर बैठे. रंजीत को पाने की चाहत रख जेल से छूटते ही रंजीत से मिलने के लिए पप्पू यादव अक्सर उस टेनिस क्लब में पहुंच जाते, जहां वो टेनिस खेलती थीं.
रंजीत से सुननी पड़ी थी डांट
पप्पू यादव की आदत रंजीत को अच्छी नहीं लगती थीं, उन्होंने कई बार मना किया, मिलने से रोका और कठोर शब्द भी कहे. लेकिन पप्पू यादव उनके सामने डटे रहे. रंजीत ने यहां तक कह दिया कि वे सिख हैं और पप्पू हिंदू और उनके परिवार वाले ऐसा होने नहीं देंगे.
पप्पू ने खा ली थी नींद की गोली
रंजीत के रूखे व्यवहार से हताश होकर एक बार पप्पू यादव ने सुसाइड करने के लिए ढेर सारी नींद की गोलियां खा ली थी, जिसके बाद उन्हें पीएमसीएच में भर्ती कराया गया. उन्होंने अपनी किताब ‘द्रोहकाल का पथिक’ में भी विस्तार से चर्चा किया है. इस घटना के बाद से ही रंजीत का व्यवहार बदलने लगा. लेकिन इन दोनों की राहें अभी भी आसान नहीं थीं.
रंजीत के परिजन थे खिलाफ
पप्पू के परिवार से इस शादी के लिए कोई समस्या नहीं थी, लेकिन रंजीत रंजन के पिता ग्रंथी थे और शुरू से ही इस विवाह के खिलाफ थे. पप्पू ने रंजीत के परिजनों को मनाने का जिम्मा बहन-बहनोई कोदी. दोनों रंजीत की फैमिली को मनाने के लिए चंडीगढ़ गए, फिर भी बात नहीं बनी. तमाम कोशिशों के बावजूद हर बार हताशा मिली, जिससे पप्पू काफी निराश हो गए.

एसएस अहलूवालिया ने की मदद
अपनी किताब ‘द्रोहकाल का पथिक’ में पप्पू यादव लिखते हैं कि किसी ने उन्हें कांग्रेस नेता एसएस अहलूवालिया से मिलने की सलाह दी. अहलूवालिया जी आपकी मदद कर सकते हैं, ऐसे में पप्पू यादव तुरंत उनसे मिलने के लिए दिल्ली जा पहुंचे. पप्पू यादव ने इस घटना को किताब में विस्तार से बताया. एसएस अहलूवालिया साहब की पहल से रंजीत के सिख परिजनों को मनाने में मदद मिली. आख़िरकार फरवरी 1994 में पप्पू यादव और रंजीत की शादी हो गई.
चार्टड विमान से पहुंचे थे लोग
पप्पू यादव की शादी पूर्णिया के एक गुरुद्वारे में होनी थी, लेकिन बाद में आनंद मार्ग पद्धति से हुई. इस दौरान रंजीत के परिजन चार्टड विमान से पहुंचे थे. हालांकि, शादी की गहमागहमी के बीच टेंशन उस वक्त बढ़ गई, जब विमान का पायलट रास्ता भटक गया. खैर विमान सही सलामत पहुंचा तो लोगों ने राहत की सांस ली. इस दौरान शादी में तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव, डीपी यादव, राज बब्बर सहित कई दिग्गज शरीक हुए थे.
आध्यात्मिक हैं रंजीता
अपनी शादी के बारे में पप्पू यादव कहते हैं, “हमारी शादी में काफी मुश्किलें आईं, क्योंकि यह दूसरे धर्म में शादी की बात थी. हमारी तरफ़ से तो सहयोग था. हमारे परिवार के स्तर पर कोई परेशानी नहीं थी.” वहीं, रंजीत के बारे में बात करते हुए पप्पू कहते हैं कि रंजीत जी खुद आध्यात्मिक हैं. बहुत अच्छा बोलती हैं. व्यक्तित्व बहुत अच्छा है. ईमानदारी से जीतीं हैं. लाग-लपेट में नहीं रहती हैं. बच्चों के लिए बेस्ट मां हैं.

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