पटनाः खरमास खत्म होने के बाद भी अब तक बिहार में नीतीश कैबिनेट का विस्तार नहीं हो सका है. इस सप्ताह मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावना है. इसे सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले के तहत ही लागू किया जायेगा. इसको लेकर बीजेपी और जदयू की तरफ से अंतिम तैयारी की जा रही है.

अब इस पर अंतिम रूप से मुहर लगने का इंतजार है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल समेत बिहार बीजेपी के कई बड़े नेता दिल्ली में कैंप कर रहे हैं. मंत्रिमंडल विस्तार में देरी के कारणों पर वरिष्ठ नेताओं ने किसी भी विवाद से इनकार किया है. बावजूद इसके मंत्रिमंडल विस्तार में देरी के पीछे का कारण मंत्रियों की संख्या में तालमेल पर पेंच फंसना बताया जा रहा है.

50-50 पर बनी सहमति

फिलहाल सरकार के 44 विभागों में से 20 जदयू, 21 भाजपा, दो हम और एक वीआइपी के पास है. कैबिनेट में कुल 36 मंत्री बन सकते हैं. हालंकि, मुख्यमंत्री को छोड़कर फिलहाल 13 मंत्री हैं. सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि बीजेपी और जदयू में 50:50 पर मंत्रियों के बंटवारे की सहमति बन गयी है.

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वहीं, चर्चा यह भी है कि बीजेपी 36 में 22 मंत्री अपने कोटे से चाहती थी और जदयू कोटे से 14 मंत्री. जिसमें कोटे के हिसाब से मुकेश सहनी और जीतन राम मांझी की पार्टी भी थी.

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