पटनाः सोशल मीडिया पर राज्य के सरकार, मंत्री, विधायक और सांसद सहित सरकारी अधिकारी के खिलाफ टिप्पणी करने पर कार्रवाई करने के संबंध में एक पत्र जारी किया गया है. इस पर बिहार में बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने लेटर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह डरी हुई सरकार का फैसला है.

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कांग्रेस नेता ने कहा कि इस फैसले का उपयोग दूसरे पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं के ऊपर किया जाएगा अगर आपको कार्रवाई करनी ही है तो सुशील मोदी, गिरीराज सिंह और नीरज सिंह पर कीजिये अगर आपके काम पर कोई सवाल उठाता है तो क्या आप उसपे कार्रवाई करेंगे ये गलत फैसला है इसको वापस लेना चाहिए.

आरजेडी ने बताया काला अध्याय

वहीं, आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने इसे काला अध्याय और लोकतंत्र पर कठोराघात है. आरजेडी विधायक ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के गलतियों और पदाधिकारियों को बचाने के लिए यह किया गया है. उन्होंने कहा कि ऐसे सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को प्रताड़ित किया जाता है.

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आरजेडी विधायक का कहना है कि मीडिया, सोशल मीडिया सरकार की गलतियों को दिखाती है. लेकिन अपने कारगुजारियों को छुपाने के लिए यह अध्यादेश निकाला गया है. इसके जरिए अपनी चहेते पदाधिकारियों को बचाने के लिए ऐसा किया गया है, इसका घोर विरोध हो रहा है सभी जगहों पर और हम भी इसका विरोध करते हैं. जो सही है उसे सही मानना चाहिए और इस माध्यम से कई लोगों पर केस करने की साजिश रची जा रही है.

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