पटनाः सीएम नीतीश कुमार आज जेडीयू कार्यालय पहुंचे जहां मीडिया से बातचीत की. बजट को लेकर नीतीश कुमार ने कहा कि इसका पूरा सेशन प्रकाशित हो चुका है. फूल बजट सेशन जो पूर्व में हुआ करता था वैसे ही इस बार भी होगा. इस दौरान कोरोना को लेकर कहा कि जांच और इलाज में बिहार की स्थिति काफई तेजी से बदली है फिर भी आगे की स्थिति को लेकर लोगों को सचेत रहना है.

बिहार में टीकाकरण भी शुरू हो गया है. दूसरे चरण का अभी चल रहा है और इसके बाद 50 साल से अधिक उम्र वाले लोग और उससे कम उम्र के लोग जो गंभीर बीमारी से ग्रस्त है उनका टीकाकरण कराया जाएगा. टीकाकरण के लिए वैक्सीन दूसरे जगहों पर भी भेजा गया है और इसका लाभ भी लोगों को मिल रहा है और इससे लोग सुरक्षित होंगे कोरोना का प्रभाव से मुक्त होंगे और इसी को ध्यान में रखकर सबकुछ किया जा रहा है.

पिछले साल की तरह बजट सत्र

इस स्थिति में बजट का पूरा सत्र रखना है और जिस प्रकार से पहले सत्र की कार्यवाही होती थी उसी प्रकार इस बार भी कार्यवाही होगी. सभी लोगों को सतर्कता बरतने की बात कही जा रही है. सभी लोग मास्क लगा कर रहे और खुद सचेत रहे और हमलोग को पूरी उम्मीद है किसी प्रकार की समस्या नही आनी चाहिए, सभी लोग सचेत रहेंगे.

पहले की भाति ही मिलता रहेगा आरक्षण

आरक्षण के सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा कि जिन्हें एकबार आरक्षण का लाभ मिला है उन्हें दुबारा नहीं मिलेगा ऐसी कोई बात नहीं है, यहां पर तो जो नियम है बहुत पहले से लागू है उसमें ऐसी बात नहीं है. केंद्र का नियम भी बहुत पहले से लागू है. आर्थिक आधार पर जो लोग हैं चाहे वो पिछड़ा हो या अन्य वैसे लोग के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया गया है, तो ऐसा नहीं है कि जो प्रावधान है वो नहीं चलेगा.

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आरक्षण के प्रावधान में यदि कोई परिवर्तन की बात हो जैसे यहां पिछड़े वर्ग के लिए जो आरक्षण है उसमें पिछड़ा वर्ग और अतिपिछड़ा वर्ग दो अलग किया हुआ है और ये जननायक कर्पूरी ठाकुर की सरकार ने किया था और वो चल रहा है. नीतीश कुमार ने कहा, हम चाहते हैं कि ये केंद्र में भी हो जाये हालांकि केंद्र में सिर्फ एक है और आरक्षण का लाभ. यदि विभिन्न प्रकार से मिल रहा है तो ये अच्छा है और उसपर कोई चर्चा चल रहा है तो ये अलग बात है पर किसी को वंचित करने की नही हो सकता.

होनी चाहिए जातिय जनगणना

जातीय जनगणना पर विपक्ष के सुर में सुर मिलाते हुए नीतीश कुमार ने कहा, केवल हम ही नहीं कह रहे बल्कि विधान सभा और विधान परिषद में कई बार इसे स्वीकृत करा कर केंद्र को भेजा है कि एकबार ऐसा होना चाहिए. दो बार केंद्र सरकार को भेजा गया है. जातिय आधारित जनगणना एकबार होनी चाहिए. पहले होता था पर आजादी के पूर्व से ही बंद हो गया लेकिन ऐसा होने से एक एक चीज की सही जानकारी मिल जाएगी कि किस जाति के कितने लोग हैं और तब इनसभी चीज़ो पर निर्णय लेना बेहतर होगा.

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