ना नुकूर करते रह गई नीतीश सरकार, हैदराबाद से झारखंड के मजदूरों को ले आए हेमंत सोरेन

प्रवासी मजदूरों की घर वापसी शुरू, तेलंगाना से झारखंड के लिए विशेष ट्रेन रवाना

अपने राज्यों से हजारों किलोमीटर दूर फंसे कामगार और छात्र-छात्राओं की घर वापसी अब आसान हो जाएगी. दरअसल, शुक्रवार सुबह हैदराबाद के लिंगमपल्ली स्टेशन से 1284 मजदूरों को लेकर एक विशेष ट्रेन झारखंड के हटिया के लिए रवाना हुई है. आरपीएफ के डीजी अरूण कुमार ने बताया कि हैदराबाद से खुलने वाली यह ट्रेन नॉन-स्टाप चलेगी और शुक्रवार रात ही करीब साढ़े ग्यारह बजे के आसपास हटिया पहुंच जाएगी.

इस विशेष ट्रेन के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि देश के कई राज्यों से प्रवासी मजदूरों को उनके घर वापस भेजा जाएगा. फिलहाल मजदूरों के लिए ट्रेन चलाने का फैसला नहीं हुआ है. लेकिन रेल मंत्रालय का कहना है कि इसे राज्य सरकार की अपील पर चलाया गया है. जिसमें सभी तरह के नियमों का पालन किया गया है.

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ये अकेली ऐसी ट्रेन है जिसे चलाया गया है. राज्य सरकार और रेल मंत्रालय के निर्देश के बाद आगे किसी ट्रेन को चलाने पर फैसला लिया जाएगा. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से मजदूरों की वापसी के लिए विशेष ट्रेन चलाने की मांग की थी.

नीतीश जी बीजेपी का पिछलग्गू बनकर ही रहिएगा या बिहारियों के लिए कुछ कीजिएगा

मजदूर दिवस के मौके पर आज आरजेडी नेता उपवास हैं. वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीएम पर तंज कसा है. फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जी,

झारखंड के मज़दूर तेलंगाना से विशेष ट्रेन से झारखंड लाए जा रहे है. क्या आप BJP के पिछलग्गू ही बने रहेंगे या बिहारहित में अपनी अंतरात्मा, ताक़त व अनुभव का भी कुछ फ़ायदा उठायेंगे? आप तो रेल मंत्री भी रहे है. केंद्र और राज्य में आपकी दमदार सरकारें है.

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बिहार से NDA के 50 सांसद है. केंद्र और राज्य में रामबिलास पासवान जी और आप जैसे अनुभवी एवं कथित धुरंधर और चाणक्य है. फिर भी बिहार को ना ज़रूरी स्वास्थ्य उपकरण, वेंटिलेटर और ना ही ट्रेन की मदद मिल पा रही है. अब आप सहित सभी बिहारवासियों को आदरणीय श्री लालू प्रसाद जी का महत्व समझ में आ रहा है.

बताइए, जब झारखंड को ट्रेन मिल सकती है तो ड़बल इंजन बिहार सरकार को क्यों नही? क्या इसी विकास की खोज में जनादेश का अपमान किया गया था?

आप विपक्ष के इस अहम सवाल से भाग नही सकते?

बिहारी स्टूडेंट्स और माइग्रेंट वर्कर्स के लिए खुशखबरी, घर पहुंचाएगी रेलवे, सरकार को सौंपा ये इंटरनल प्लान

कोरोनावायरस (Coronavirus) के फैलाव को रोकने के लिए सरकार के देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) लगाने के बाद से कई लोग अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग हालातों में फंस गए हैं. ऐसे में राज्य सरकारें दूसरे राज्यों में फंसे अपने स्टूडेंट्स और माइग्रेंट वर्कर्स को वापस उनके घर पहुंचाने के इंतज़ाम कर रही हैं. सेंट्रल गवर्नमेंट के आदेश के बाद राज्य सरकारें बस भेजकर इन सभी लोगों को वापस ला रहे हैं.


कुछ राज्यों ने केंद्र सरकार से स्पेशल ट्रेन (Special Trains) चलाने की मांग की है ताकि सबको आसानी से वापस लाया जा सके. रेल मिनिस्ट्री भी इस बात पर विचार कर रही है कि लॉकडाउन (Lockdown) प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए हर दिन 400 से 1000 स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक लोगों की संख्या और दूरी ज्यादा होने की वजह से कुछ राज्यों ने केंद्र सरकार से स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की है ताकि सबको आसानी से वापस लाया जा सके. रेल मिनिस्ट्री भी इस बात पर विचार कर रही है कि लॉकडाउन प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए हर दिन 400 से 1000 स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएं.

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3 मई के बाद पैसेंजर ट्रेन चलेंगी या नहीं फ़िलहाल तो इस बात का कोई अंदाजा नहीं है, ऐसे में रेलवे ने इंटरनल प्लान बनाकर ये बात सरकार तक पहुंचाई है. प्लान के हिसाब से यह स्पेशल नॉन-एसी ट्रेनें एक बार में 1000 लोगों को ही लेकर आएंगी जिससे सोशल डिस्टेंसिंग (social distancing) मेंटेन रहे हैं.

एक सीनियर गवर्नमेंट ऑफिसर ने बताया कि इन सबके साथ ही रेलवे ने इस बात का भी ध्यान अपने प्लान में रखा है कि यात्रा के दौरान बीच में पड़ने वाले सभी स्टेट इन स्पेशल ट्रेनों को आसानी से जाने दें. उन्होंने कहा कि ट्रेन चलाने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि दूर फंसे हुए माइग्रेंट वर्कर्स को उनके घर पहुंचा कर उन्हें कुछ राहत दी जाए. इसलिए लंबी दूरी के लिए ट्रेन से अच्छा ट्रांसपोर्ट मीडियम और कोई नहीं है.

राजस्थान सरकार को मिले 6 लाख प्रवासी मजदूरों के आवेदन

इस बारे में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने Tweet करते हुए कहा, ‘माइग्रेंट वर्कर्स को उनके घर पहुंचाने की रिक्वेस्ट भारत सरकार ने सुन ली है, जल्द ही इसके लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी. कुछ ही दिन के अंदर राजस्थान सरकार को यहां फंसे हुए दूसरे राज्यों के 6 लाख से ज्यादा माइग्रेंट वर्कर्स के रजिस्ट्रेशन मिले हैं.’

नीतीश के मंत्री का प्रवासियों को लेकर बयान-बिहार आइए लेकिन कोरोना लेकर मत आइए

बिहार के श्रम मंत्री विजय सिन्हा ने अप्रवासी लोगों के बिहार आने पर कहा है कि जो बाहर रहते हैं अगर वो अपने राज्य आना चाहते हैं तो आएं उनका स्वागत है. उनका अपना घर है लेकिन जब बिहार आएं तो अपने साथ कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी ना लाएं.

एक निजी न्यूज चैनल से बातचात मे विजय सिन्हा ने कहा कि बड़ी आबादी को बिहार में लाने में समस्या है. बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो हालात ठीक होने के बाद बिहार नहीं आना चाहते हैं. समस्या है तो हमारी सरकार उन राज्यों से बात कर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे. लेकिन ये प्रक्रिया कब तक चलेगी इस बारे में फिलहाल कुछ नहीं कह सकते हैं.

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गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कुछ शर्तों के साथ अप्रवासी मजदूरों और छात्रों को लाने की इजाजत बिहार सरकार को दी है. हालांकि, बिहार सरकार के सामने सरकारी बसों की संख्या बहुत कम होने से समस्या आ रही है. बिहार में मात्र 350 और PPE मोड पर सरकारी बसों की संख्या 250 है. कुल 600 बसें ही हैं इसमें 120 सिटी बसे हैं. हालांकि, लगभग 20 हजार से ज्यादा बस प्राइवेट है.

घर का जेवर बेच लोगों के लिए मास्क बना रहा मुस्लिम परिवार, तारीफ कर रहे लोग

बिहार सरकार ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए राज्य में मास्क पहनना अनिवार्य किया है. ऐसे में लोगों के बीच मास्क मुहैया कराने के लिए जिले का एक एक मुस्लिम परिवार घर का जेवर बेचकर मास्क बनाने में जुटा है. मुस्लिम परिवार कटिहार के फलका प्रखंड के महेशपुर पंचायत स्थित सालेहपुर गांव का रहने वाला है. बुजूर्ग महिला शाहिदा और उनके पति दिनभर में करीब 4 से 5 दर्जन मास्क का निर्माण कर लोगों के बीच बांट रहे हैं.

मुस्लिम परिवार का उद्देश्य गरीब, दलित और झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों को फ्री में मास्क बांटना है. ऐसे जगहों पर लोगों को मास्क के अलावा साबुन भी फ्री में बांट रहे हैं. इस काम में बुजूर्ग महिला का बेटा भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहा है. बता दें कि महिला के पति कादिर नेपाल से कपड़ा कटिंग टेलरिंग का काम छोड़ वापस घर लौटे हैं. ऐसे में पूरा परिवार मिलकर मास्क का निर्माण और वितरण करने में जुटा है.

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मास्क बांटता शाहिदा का बेटा

बता दें कि शाहिदा और उनके पति कादिर दिन भर मास्क को तैयार करते हैं. वहीं, तैयार किये गए मास्क को बुजूर्ग का बेटा सोनू अपनी टोलियों के साथ घूम-घूम कर जरुरतमंद लोगों के बीच फ्री में बांटता है. इसके अलावा पुलिस कर्मियों को भी मास्क खुद से पहनाते हैं. मास्क के साथ साबुन भी दिया जाता है. ताकि, कोरोना के संक्रमण से लोगों को बचाया जा सके. घर का जेबर बेच कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने की मुहिम की लोग खुब प्रशंसा कर रहे हैं. 

प्रवासी मजदूरों को लेकर नीतीश सरकार पर भड़की मांझी की पार्टी, कहा-नौटंकी कर रही सरकार

पटनाः  गृह मंत्रालय ने मजदूरों और छात्र को लॉक डाउन के दौरान बिहार लाने के लिए गाइड लाइन जारी किया है. इस मामले में बिहार में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गयी है. डिप्टी सीएम के बयान पर जीतनराम मांझी की पार्टी ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है. हम प्रवक्ता विजय यादव ने गाइड लाइन जारी करने को लेकर जहां गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया है. वहीं, बिहार सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि इस मामले पर बिहार सरकार अभी भी नौटंकी कर रही है.

हम प्रवक्ता विजय यादव ने आरोप लगाते हुए कहा का कि इससे पहले केंद्र के नियम का हवाला देकर नीतीश कुमार अप्रवासी बिहारी मजदूर और छात्र को बिहार नहीं लाना चाहते थे. वहीं, अब साधन नहीं होने का बहाना बनाया जा रहा है. हम नेता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह का बयान उनके मंत्री दे रहे है जो कि गलत है. अभी भी सरकार की नियति ठीक नहीं है.

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हम प्रवक्ता ने कहा कि सरकार कोटा में पढ़ने वाले अमीरों के बच्चों को लाने की कोशिश में जुटी है. लेकिन, मजदूरों को लेकर सरकार की सोच अच्छी नहीं है. विजय यादव ने स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर बिहार सरकार अपने खर्चे पर प्रवासी बिहारी मजदूर को नहीं लाएगी तो हम पार्टी पूरे राज्य में आमरण अनशन करेगी. इसके बाद हम पार्टी पूरे बिहार में सरकार के खिलाफ आंदोलन भी करेगी.

पप्पू यादव के बाद तेजस्वी ने भी बढ़ाया मदद का हाथ, कहा- 2 हजार बस है तैयार

तेजस्वी ने कहा कि जैसा कि बिहार सरकार ने असमर्थता जताते हुए कहा है कि बाहर फंसे मज़दूरों को वापस लाने के लिए सरकार के पास बसें नहीं है. हम विपक्ष में रहते हुए भी बिहार सरकार को 2000 बसें सुपुर्द करने के लिए तैयार है.

सरकार स्वास्थ्यकर्मियों, प्रशासनिक और नोडल अधिकारियों की निगरानी में इन बसों का प्रयोग कर सकती है. बसें पटना में कब और कहां भेजनी है, कृपया बताया जाए.

विगत 15 सालों से सत्ता से चिपके असमर्थ-असहाय लोग कहते है कि बिहार सरकार के पास मात्र 500-600 बसें है. हम आपको गरीब मजदूरों की मदद के लिए उससे तीन गुणा अधिक बस सौंप रहे हैं. चूंकि यह राज्य सरकारों से संबंधित मामला है इसलिए आप इन बसों का अपनी निगरानी में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए प्रयोग कर सकते है.

नीतीश सरकार से टूटा था ऋषि का दिल, ट्वीट कर कहा था- ‘कभी नहीं जाऊंगा बिहार’

सुपर स्टार ऋषि कपूर आज का निधन हो गया है.67 वर्षीय अभिनेता ने गुरुवार को अंतिम सांस ली. फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने वाले ऋषि ने अभिनय की दुनिया में खूब नाम कमाया ही था. इसके अलावा वे सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहते थे. वे अपने ट्वीट के जरिए देश के सम-सामायिक मुद्दों पर अपनी अपनी राय रखते रहते थे. ऋषि कपूर ने बिहार सरकार की ओर से पूर्ण शराबबंदी लागू होने के फैसले पर सवाल उठाया था.

उन्होंने एक और ट्वीट में कहा था, ‘शराब के लिए 10 साल की जेल, अवैध तरीके से हथियार रखने पर पांच साल? वाह CM नीतीश! मैं बिहार (Bihar) नहीं आ रहा! 2016 में आप इतने अदूरदर्शी कैसे हो गए?’

ऋषि कपूर ने अपने ट्वीट में कहा था, ‘बिहार (Bihar) सरकार शराब की तस्करी और अवैध शराब को बढ़ावा देने वाला कदम उठाई है. दुनियाभर में शराब पर प्रतिबंध असफल रहा है.जाग जाओ. बिहार (Bihar) तुम्हें 3,000 करोड़ रुपये के राजस्व का भी नुकसान होगा.’

अभिनेता अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर ऋषि कपूर के निधन की सूचना दी है. ऋषि कपूर 2 साल से कैंसर से जूझ रहे थे. उनके भाई रणधीर कपूर ने बताया था कि उनको सांस लेने में तकलीफ थी, जिसके चलते उनकी फैमिली ने हॉस्पिटल में ऐडमिट करवाया था.

ऋषि कपूर यूएस में करीब 1 साल इलाज करवाने के बाद बीते सितंबर भारत लौटे थे. फरवरी में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती करवाया गया था.

अब काम नहीं चलेगा, हर हाल में लोगों को बिहार लाना होगा

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार से कहा है दूसरे राज्य से लोगों को हर हाल में बिहार लाना होगा. उन्होंने कहा कि अब जब केंद्र सरकार ने हमारी लगातार माँग और जन दबाव के आलोक में नीतिगत फ़ैसला लेते हुए बाहर फँसे हुए मज़दूरों और बच्चों को लाने की अनुमति दे दी है तो बिहार सरकार को अविलंब बिना किंतु-परन्तु अप्रवासी बिहारी श्रमवीरों को बिहार लाने की तत्काल व्यवस्था में युद्धस्तर पर लग जाना चाहिए.

सरकार से आग्रह करूँगा की देश के हरेक कोने कश्मीर से केरल और असम से लेकर गुजरात में फँसे हुए प्रत्येक बिहारी को सकुशल और ससम्मान उनके घर तक पहुँचाना कर्तव्य के साथ ज़िम्मेदारी भी है. चूँकि ये ग़रीब मज़दूर वर्ग के लोग हैं तो पूर्व की भाँति इनके साथ कोई बदइंतज़ामी नहीं होनी चाहिए.

बाहर फँसे मज़दूरों के स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधित सभी मानकों का अनुपालन करते हुए उनकी यात्रा, भोजन और राशन का उचित प्रबंध कर सभी की सकुशल वापसी अवश्य सुनिश्चित करें.आशा है अब बिहार सरकार संसाधनों का रोना नहीं रोकर, गृह मंत्रालय के निर्देशों के आलोक में केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों से समन्वय स्थापित कर उनके लिए तुरंत बसों का प्रबंध कर वापस बुला लेगी.

इन सभी बिहारवासियों को प्रस्थान से पहले चिकित्सीय परीक्षण और बिहार आगमन पर पुनः स्वास्थ्य जाँच, इलाज़ और अच्छे क्वॉरंटीन केंद्रों में की क्वॉरंटीन की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए.

बिहार सरकार बिना कोई बहाना किए बाहर फँसे मज़दूरों की यात्रा, भोजन और राशन का उचित प्रबंध कर सभी की सकुशल वापसी सुनिश्चित करें. आशा है अब बिहार सरकार संसाधनों का रोना नहीं रोकर, गृह मंत्रालय के निर्देशों के आलोक में केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों से समन्वय स्थापित कर उनके लिए तुरंत बसों का प्रबंध कर वापस बुला लेगी.

केंद्र सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब यह राज्य सरकार से राज्य सरकार का मसला है. अधिकांश राज्यों में भाजपा शासित सरकारें है. बिहार की ड़बल इंजन सरकार अब अविलंब सभी को वापस लेकर आयें.

बिहार सरकार के ना नुकूर के बीच पप्पू यादव ने भेजे कोटा में 30 बस, कहा-सबको हम लाएंगे

जाप संरक्षक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कोटा से छात्रों को लाने के लिए 30 बस भेजा है. फिलहाल इन बसों में बिहार के छात्र मेडिकल चेकअप के बाद बिहार लाए जाएंगे. पप्पू यादव ने ट्वीटर पर जानकारी देते हुए कहा कि बिहार सरकार के पास धन नहीं है, मैं तन-मन-धन से हर बिहारी को बिहार लाने को प्रतिबद्ध हूं. कोटा से छात्रों को लाने हेतु वहां 30 बस लगवा दिया है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी से आग्रह है कि वह बस सेनेटाइज करवा कर, छात्रों की सुरक्षित यात्रा का इंतज़ाम सुनिश्चित कराएं.