पासवान जी स्वर्ग में बैठकर सोचिएगा कि ‘राम’ बनकर आपने अपनी पत्नी को जीवन का कौन सा सुख दिया

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राम विलास पासवान का जन्म बिहार के खगड़िया जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। खग​ड़िया भी मिथिला क्षेत्र का अंग है। उसी मिथिला में एक कहावत है कि सीता जन्म वियोगे गेल, दुख छोड़ि सु​ख कहियो नहि भेल। अर्थात सीता का जन्म ही एक वियोग है, जिसने दुख छोड़ सुख कभी नहीं भोगा। आप सोच रहे होंगे कि मैं आपको राम सीता की कहानी क्यों सुना रहा हूं। अरे भाई मैं आपको स्वर्गीय पासवानी जी की कहानी बता रहा हूं। उनका और रामायण का गहरा संबंध है। उनका नाम राम है। हां उनकी पत्नी का नाम भले सीता ना होकर राजकुमारी देवी है। कहा जाता है कि चौदह वर्ष की उम्र में रामविलास पासवान की शादी राजकुमारी देवी के संग हुआ था। दुल्हा अगर चौदह साल का था तो जाहिर सी बात है राजकुमारी देवी मात्र आठ से दस साल रही होगी।


अब मुद्दे की बात कल जैसे ही रामविलास पासवान की निधन का खबर आया वैसे ही सोशल मीडिया में राजकुमारी देवी का वीडियो वायरल होने लगा। एक पति द्वारा त्यागे जाने के बाद भी एक सुहागन महिला विधवा होने पर किस तरह विलाप कर रही थी। गांव के लोग उन्हें चुप करा रहे थे, लेकिन जिसका सबकुछ हमेश हमेशा के लिए लूट गया हो वह कैसे चुप होती।

बीबीसी की पत्रकार सीटू तिवारी कहती हैं कि शादी के बाहर मैंने बहुतो को प्रेम करते देखा है।कुछ लोग बहुत grace के साथ अपनी पत्नी को बताते है और प्रेमिका से रिश्ता बनाते है। मुझे ऐसे लोगो से ज्यादा शिकायत नही रहती। क्योंकि मनुष्य है हम सब। जरूरी नही कि जिससे शादी हो , उससे प्रेम हो – मन मिले। प्रेम विवाह तक मे ये संभावना है कि आपका मन एक वक्त के बाद नही मिले और सिर्फ बच्चो के लिये आप एक साथ रहे।

लेकिन मुझे उनसे शिकायत है जो अपनी ब्याहता को यू ही छोड़ देते है। वैसी ब्याहता जिसके लिये उसका पति ही दुनिया का अंतिम सत्य है।इस औरत का विलाप सुनकर मेरा दिल अंदर तक दहल गया। क्या इनको कभी अपने साथ पटना तक भी लाये रामविलास पासवान? इस औरत के क्या हक़ थे? ये बेचारी तो अपने घर के बाहर बैठे, मांग मे लाल सिंदूर लगाए उनका अंतहीन इंतेज़ार करती रही।

जाने अंतिम बार भी इनको अपने पति को देखने को मिलेगा! माँ बाप ने भी जाने क्या सोचकर नाम रख दिया था राजकुमारी देवी। किस्मत तो महारानी जैसे जीने की ही मिली लेकिन राजा का सुख इनके हिस्से न आया।

पत्रकार प्रीति सिंह कहती हैं कि …मुझे भी ये देख कर बहुत पीड़ा हुई थी। सुहागन के नाम पर अंतहीन इंतज़ार मिला। रामविलास जी न तो इन्हें सामाजिक सम्मान दे पाए और न ही एक पत्नी का ओहदा।

Copy:dailybihar.com

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