बिहार में पूर्णिया, रक्सौल, मुजफ्फरपुर में नए एयरपोर्ट बनने की उम्मीद, लेकिन ये दिक़्क़त है…

0
18

हवाई यात्रा करने वाले बिहार के यात्रियों के लिए एक खुशखबरी है। बिहार को जल्द ही नये एयरपोर्ट मिल सकते हैं। केन्दीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिंया ने बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर पुराने हवाई अड्डे के विस्तारीकरण और नये एयरपोर्ट के निर्माण के लिए जमीन मांगी है। अगर सरकार ने जल्द ही केन्द्र को जमीन उपलब्ध करा दी तो पूर्णिया, रक्सौल और मुजफ्फरपुर में नया एयरपोर्ट बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

केन्दीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जिन जगहों पर नये एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव दिया है, वहां की अद्यतन स्थिति क्या है…

पूर्णिया एयरपोर्ट

पूर्णिया में एयरपोर्ट की मांग लंबे अरसे से लगातार उठती रही है। इसके शुरु होने से सीमांचल के अलावा कोसी कमिश्नरी को भी लाभ होगा। इस रास्ते से नेपाल और बंगाल से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। फिहलहाल लोगों को बागडोगरा एयरबेस या दरभंगा एयरपोर्ट के सहारे आवाहजाही करनी पड़ती है। इन दोनों एयरपोर्ट दिल्ली से पहुंचने में जितना समय लगता है। उतना ही विमान से उतरने के बाद लोगों को गांव पहुंचने का समय लगता है। इस लिहाज हवाई सफर के मायने नहीं रह जाते हैं। वैसे पूर्णिया पूर्व उत्तर बिहार का सबसे बड़ा हब है। जहां पर चाय से लेकर मकई का व्यापार बड़े पैमाने पर होता है। वहीं एशिया की सबसे बड़ी मंडी गुलाबबाग भी यहीं पर है। एयरपोर्ट के संचालन से लोगों को आर्थिक प्रगति की उम्मीद है साथ ही सामरिक दृष्टि से ये महत्वपूर्ण भी है।

18 अगस्त 2015 को पूर्णिया हवाई अड्डा सेवा बहाल करने की घोषणा की गई थी। उड़ान योजना के तहत 2015 में पूर्णिया एयरपोर्ट के लिए 52.18 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने के लिए सरकार ने करीब 20.25 करोड़ की राशि मुहैया कराई है। लेकिन जमीन अधिग्रहण को लेकर पेंच फंस गया है । गोआसी के ग्रामीणों ने जमीन अधिग्रहण को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। जिसके बाद से काम अधर में लटक गया है। उधर दरभंगा एयरपोर्ट से ऑपरेशन शुरु होने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

रक्सौल एयरपोर्ट

भारत-नेपाल सीमा अंतर्गत रक्सौल शहर से तीन किलोमीटर दूर पनटोका पंचायत स्थित सामरिक और व्यवसायिक महत्व रखनेवाला रक्सौल हवाई अड्डा बदहाल है। इसके खाली पड़े भूभाग पर पहले जहाँ सशस्त्र सीमा बल का कैम्प हुआ करता था आज वहां खेती व किसानी हो रही है। दरअसल 1960 में हवाई अड्डा की परिकल्पना की गई थी। और 1962 में चीन-भारत युद्ध के समय सेना के विशेष लैंडिंग के लिए इसकी शुरुआत की। बाद में 1968 में एयर सर्विस की शुरूआत भी की गई। लेकिन 1970 में घाटे और यात्रियों की कमी के वजह से इस सेवा को बंद कर दिया गया। उसके बाद से यह क्षेत्र वीरान पड़ा है।

मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट

शाही लीची का शहर मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के लोगों के काफी दिनों से पताही एयरपोर्ट से हवाईजहाज के उडने का इंतजार है। उत्तर बिहार की अघोषित राजधानी कहा जाने वाला मुजफ्फरपुर रामायण सर्किट से जुडा है। यहां औद्योगिक, व्यवसायिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भरी है। तीन वर्ष पहले जब नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु थे, तब बिहार के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा को आश्वासन दिया था कि जल्द ही एयरपोर्ट का सर्वे कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया था कि एयरपोर्ट के व्यवसायिक उपयोग के लिए सर्वे कराने और उडान शुरु करने के लिए निजी विमान कंपनियों की बैठक भी बुलाई जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब एक बार फिर केन्द्र ने दिलचस्पी दिखाई है।

अब नजर इस बात पर होगी कि केन्द्र मंत्री ने नीतीश कुमार को जो पत्र लिखा है, उसपर कितनी जल्दी एक्शन होता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here