कोरोनावायरस (Coronavirus) के फैलाव को रोकने के लिए सरकार के देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) लगाने के बाद से कई लोग अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग हालातों में फंस गए हैं. ऐसे में राज्य सरकारें दूसरे राज्यों में फंसे अपने स्टूडेंट्स और माइग्रेंट वर्कर्स को वापस उनके घर पहुंचाने के इंतज़ाम कर रही हैं. सेंट्रल गवर्नमेंट के आदेश के बाद राज्य सरकारें बस भेजकर इन सभी लोगों को वापस ला रहे हैं.


कुछ राज्यों ने केंद्र सरकार से स्पेशल ट्रेन (Special Trains) चलाने की मांग की है ताकि सबको आसानी से वापस लाया जा सके. रेल मिनिस्ट्री भी इस बात पर विचार कर रही है कि लॉकडाउन (Lockdown) प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए हर दिन 400 से 1000 स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक लोगों की संख्या और दूरी ज्यादा होने की वजह से कुछ राज्यों ने केंद्र सरकार से स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की है ताकि सबको आसानी से वापस लाया जा सके. रेल मिनिस्ट्री भी इस बात पर विचार कर रही है कि लॉकडाउन प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए हर दिन 400 से 1000 स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएं.

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3 मई के बाद पैसेंजर ट्रेन चलेंगी या नहीं फ़िलहाल तो इस बात का कोई अंदाजा नहीं है, ऐसे में रेलवे ने इंटरनल प्लान बनाकर ये बात सरकार तक पहुंचाई है. प्लान के हिसाब से यह स्पेशल नॉन-एसी ट्रेनें एक बार में 1000 लोगों को ही लेकर आएंगी जिससे सोशल डिस्टेंसिंग (social distancing) मेंटेन रहे हैं.

एक सीनियर गवर्नमेंट ऑफिसर ने बताया कि इन सबके साथ ही रेलवे ने इस बात का भी ध्यान अपने प्लान में रखा है कि यात्रा के दौरान बीच में पड़ने वाले सभी स्टेट इन स्पेशल ट्रेनों को आसानी से जाने दें. उन्होंने कहा कि ट्रेन चलाने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि दूर फंसे हुए माइग्रेंट वर्कर्स को उनके घर पहुंचा कर उन्हें कुछ राहत दी जाए. इसलिए लंबी दूरी के लिए ट्रेन से अच्छा ट्रांसपोर्ट मीडियम और कोई नहीं है.

राजस्थान सरकार को मिले 6 लाख प्रवासी मजदूरों के आवेदन

इस बारे में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने Tweet करते हुए कहा, ‘माइग्रेंट वर्कर्स को उनके घर पहुंचाने की रिक्वेस्ट भारत सरकार ने सुन ली है, जल्द ही इसके लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी. कुछ ही दिन के अंदर राजस्थान सरकार को यहां फंसे हुए दूसरे राज्यों के 6 लाख से ज्यादा माइग्रेंट वर्कर्स के रजिस्ट्रेशन मिले हैं.’

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