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Sourav Ganguly : बीसीसीआई के टीम सेलेक्शन और खिलाड़ियों के बार-बार ब्रेक लेने के मुद्दे पर अप फैंस सोशल मीडिया पर लगातार तानों भरे पोस्ट्स शेयर कर रहे हैं। हाल ही में बीसीसीआई ने वेस्टइंडीज दौरे के लिये टीम इंडिया का सेलेक्शन किया है, जिसमें कप्तानी की जिम्मेदारी शिखर धवन को सौंपी गयी है। इस फैसले के बाद से ही लगातार ट्विटर और अन्य सोशल साइट्स पर यूजर्स बीसीसीआई को आड़े हाथ ले रहे हैं। साथ ही खबरें हैं कि इस दौरे के लिये पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली ने खुद ही ब्रेक मांगा है, जिसके बाद फैंस उन पर भी भड़क रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि बार-बार ब्रेक लेने से क्या खिलाड़ी फॉर्म में आ सकते हैं?

गौरतलब है कि हाल ही में पूर्व खिलाड़ी इरफान पठान ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय समाने रखी थी। इस मामले में अब बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपनी बात रखी है। सौरव गांगुली ने कहा है कि मैने लगातार 13 सालों क्रिकेट खेला है।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और कप्तान रह चुके गांगुली अपने समय के बेहतरीन कप्तान और खिलाड़ी भी रह चुके हैं। उन्होंने भारतीय टीम के लिए लगातार 13 साल क्रिकेट खेलने की बात कही है। उनका कहना है कि आज कल के क्रिकेटर जिस तरह से आम तौर पर ब्रेक की मांग कर देते है, तब ऐसा नहीं था। टीम से बाहर रहने को भी ब्रेक माना जाता था। गांगुली ने डोमेस्टिक क्रिकेट खेलने को लेकर भी बात बातचीत की।

Sourav Ganguly

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Sourav Ganguly : बिना ब्रेक लिए लगातार 13 साल तक क्रिकेट खेला

सौरव गांगुली ने कहा, “मुझे नहीं लगता है कि डोमेस्टिक क्रिकेट खेलना इतना मुश्किल रहा था, लेकिन ये सारी परिस्थिति ही काफी मुश्किल हो गई थी, क्योंकि यह मेरी बल्लेबाजी और गेंदबाजी क्षमता से बाहर था, जिसपर मेरा कोई नियंत्रण नहीं था। मैंने भारत के लिए लगातार 13 साल तक क्रिकेट खेला, वो भी बिना ब्रेक लिए। मैंने उस दौरान कुछ भी नहीं छोड़ा था, ना कोई सीरीज और ना ही किसी दौरे को। मैंने तो तब किसी भी तरह का कोई ब्रेक नहीं लिया था जैसा कि आज कल के क्रिकेटर आम तौर पर लिया करते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि टीम से बाहर होने के बाद जो वक्त था मैं उसी को 4 से 6 महीने के समय को ब्रेक मानता हूं। वो ही मेरे 13 साल के लगातार करियर में ब्रेक की तरह आया था, वो भी पूरे 17 साल के इंटरनेशनल करियर में”।

सौरव गांगुली ने आगे कहा कि, ” मैं गुस्से में जरूर रहता था और कभी-कभी निराशा में भी रहता था, लेकिन इसके बाद भी दोगुनी मेहनत करता था। मैने खुद को साबित करने का निर्णय ले लिया था, जिससे कि अपनी बात बता सकूं। मुझे उस समय इस बात का पता था कि मेरे अंदर काफी क्रिकेट बचा हुआ है। मैंने खुद को इस बात के लिए समझाया और ठाना कि उन्हें अपनी बात साबित करके दिखाउंगा, जिनका मेरे पूरे जीवन में सबसे ज्यादा महत्व है”।

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