पटनाः लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बाद पार्टी का कमान उनके बेटे चिराग पासवान संभाल रहे हैं. हालांकि, चुनाव के बाद उनके बिहार से अनुपस्थिति ने सियासत गर्मा रखी है. वहीं, बिहार के पूर्व राज्यपाल बूटा सिंह के निधन के बाद दिवंगत नेता रामविलास को लेकर किस्सा फिर से चर्चा में है.

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बिहार की राजनीति में पांच दशक से एक मजबूत स्तंभ बने रहे रामविलास ने खगड़िया के शहरबन्नी गांव में एक साधारण परिवार में जन्म लिया. छात्रसंघ से राजनीति में कदम रखने वाले पासवान जेपी आंदोलन में भी बिहार में मुख्य किरदार थे. बिहार पुलिस की नौकरी छोड़कर कर पासावान पहली बार वर्ष 1969 में विधायक बने. लेकिन बिहार के सीएम बनने की चाहत उनकी पूरी नहीं हो सकी. अपने आखिरी दिनों में बेटे को सीएम मटेरियल बताया था.

2005 में जीते थे 29 विधायक

बिहार विधानसभा चुनाव 2005 के दौरान एनडीए और यूपीए दोनों में से किसी भी एक गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया. ऐसे में बिहार की सत्ता की चाबी रामविलास पासवान के हाथ लग गई. राम विलास पासवान की पार्टी के 29 विधायक जीतकर आए. किसी दल को बहुमत नहीं होने के कारण सरकार नहीं बन रही थी.

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नीतीश को नवंबर तक करना पड़ा इंतजार

इस परस्थिति में राम विलास पासवान अगर उस नीतीश कुमार या लालू प्रसाद को समर्थन दे देते तो प्रदेश में सरकार बन सकती थी. मगर उन्होंने शर्त रख दी कि जो पार्टी अल्पसंख्यक को मुख्यमंत्री बनाएगी उसी का साथ वह देंगे. उनकी इस शर्त पर कोई खरा नहीं उतरा और दोबारा चुनाव में जाना पड़ा. बाद में उसी साल नवम्बर में हुए चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को बहुमत मिला और सरकार बनाई.

सीएम बनने की चाह रही अधूरी

हैदराबाद में एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे रामविलास ने 2015 में कहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मुझे बिहार का मुख्यमंत्री देखना चाहते थे.’ हालांकि, रामविलास पासवान बार-बार कहते रहे कि वो विधानसभा चुनावों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री की दौड़ में नहीं हैं. छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके रामविलास पासवान 1996 से 2015 तक केन्द्र में सरकार बनाने वाले सभी राष्ट्रीय गठबंधन चाहे यूपीए हो या एनडीए, का वह हिस्सा बने.

लालू ने दिया था मौसम वैज्ञानिक नाम

इसी कारण लालू प्रसाद ने उनको ‘मौसम विज्ञानी’ का नाम दिया था. रामविलास पासवान खुद भी स्वीकार कर चुके थे कि वह जहां रहते हैं सरकार उन्हीं की बनती है. मतलब राजीतिक मौसम का पुर्वानुमान लगाने में वे माहिर थे. हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से वह कई बार चुनाव जीते, लेकिन दो बार उन्होंने सबसे अधिक वोट से जीतने का रिकॉर्ड बनाया.

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