कैमूर: कोरोना संक्रमण के समय जब पूरे देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन लागू था,तब लाखों लोग परेशान थे. वहीं, कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने आपदा को अवसर में बदला और कुछ ऐसा कर दिखाया जिसकी अब हर तरफ तारीफ हो रही है.

ऐसे ही एक शख्स हैं बिहार के कैमूर जिले के दुर्गावती प्रखंड के कर्मनाशा निवासी पीयूष मोहन हैं.बता दें कि पीयूष पेशे से शिक्षक हैं. पीयूष ने खाली समय का इस्तेमाल करते हुए श्री रामचरितमानस को भोजपुरी में लिख डाला. इसके पीछे उनका उदेश्य यह है कि सभी लोग आसानी से रामचरितमानस पढ़ सके. इसके पहले भी उनके दो उपन्यास छप चुके हैं.

अपने अंतिम दौर में हैं पुस्तक 

इस संबंध में पीयूष मोहन ने बताया कि जब लॉकडाउन लगा तो वो पूरी तरह से खाली बैठे थे. ऐसे में उन्होंने सोचा कि क्यों नहीं रामचरित मानस को भोजपुरी में लिखा जाए, क्योंकि वह जिस भाषा में लिखा गया है, उस भाषा में सभी के लिए पढ़ना संभव नहीं है. इसलिए उन्होंने अपने खाली समय में रामचरितमानस को भोजपुरी में लिखना शुरू किया और अब वे अंतिम दौर में हैं.

छह महीने में पूरी हुई किताब

साथ ही उन्होंने बताया कि वो पिछले छह महीने से इस काम में लगे हैं. अभी कुछ अध्याय बाकी हैं, जो जल्द पूरा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि वे लोगों से अपील करते हैं कि वे भोजपुरी में लिखे गए रामचरितमानस और अन्य किताबों को पढ़ें जिससे कि समाज में भोजपुरी का मान सम्मान बढ़ सके और उसकी स्वच्छ छवि बन सके.

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