नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कोरोना संकट काल मे अपने पिता लालू प्रसाद यादव को याद किया है। फेसबुक पर इस संदर्भ में एक पोस्ट लिखा है जो इस प्रकार है।

2008 में जब कोसी नदी ने अपनी सीमाएं लांघ भयंकर तबाही मचा लाखों लोगों का जीवन प्रभावित किया था। तब तत्कालीन रेलमंत्री आदरणीय श्री लालू प्रसाद जी ने फ़्री में ट्रेन चलाई थी। बिहार के मात्र 4-5 ज़िलों के लिए ही 1000 करोड़ का पैकेज़ दिलाया। रेलवे से बिहार के मुख्यमंत्री राहत कोष में 90 करोड़ दिलाया। स्वयं 1 करोड़ रू दिया। CM तब भी नीतीश कुमार जी थे और अब भी।

लेकिन अब केंद्र और बेशर्म राज्य सरकार का ग़रीब विरोधी चेहरा देखिए। दोनों जगह ड़बल इंजन सरकार है लेकिन कोई भी ग़रीब मज़दूरों का किराया वहन करने के लिए तैयार नहीं है। ग़रीब बिहारियों को वापस लाने में शुरू से संसाधनों की कमी का रोना रो रही सरकार अब एक और बहाना खोज रही है। श्रमिकों की दयनीय स्थिति है लोग भुखमरी के शिकार हो रहे है।

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एक तरफ़ 1000₹ देने का ढिंढोरा पीट रही है और दूसरी तरफ़ राज्य सरकार के पास ग़रीबों का किराया देने का पैसा नहीं है। बिहार सरकार नैतिकता और कर्तव्यपरायणता की सारी मर्यादा भुल चुकी है।

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