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नीतीश कैबिनेट का मंगलवार (16 अगस्त) को विस्तार होने जा रहा है और महागठबंधन ने संभावित मंत्रियों के नाम लगभग तय कर लिये गए हैं। इस बीच अटकलों का बाजार भी गर्म हो गया है। खबर आ रही है कि जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का नाम मंत्रियों की लिस्ट से काट दिया गया है। हालांकि इस बारे में अभी तक जेडीयू की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और अंतिम मौके पर बड़ा फेरबदल भी हो सकता है। कहा तो यह भी जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा पटना से बाहर चले गए हैं और माना जा रहा है कि वो दिल्ली गए हैं और 19 अगस्त को वापस पटना आएंगे।

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि नई सरकार के गठन या फिर लालू यादव और नीतीश कुमार को करीब लाने में उपेंद्र कुशवाहा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। चौबीस घंटे पहले तक यह तय माना जा रहा था कि नई सरकार में जेडीयू कोटे से उपेंद्र कुशवाहा मंत्री बनेंगे। अब सवाल यह उठने लगा है कि आखिर उपेंद्र कुशवाहा को मंत्री क्यों नहीं बनाया जा रहा है? सभी जानते हैं कि उपेंद्र कुशवाहा और पूर्व मंत्री आरसीपी सिंह के बीच कभी नहीं बनी। इसके बाद भी यदि उपेंद्र कुशवाहा नई सरकार में मंत्री नहीं बन रहे हैं तो यह सोचने वाली बात होगी।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार 12 अगस्त की रात को राजधानी पटना के मौर्या होटल में कुशवाहा नेताओं की एक बैठक हुई। बताया गया है कि इस बैठक में जेडीयू में शामिल कई कुशवाहा नेता भी मौजूद थे। यह भी बताया गया है कि इस बैठक में जेडीयू के प्रदेश कमिटि के बड़े नेता भी शामिल हुए थे। इस बैठक में तय किया गया कि कुशवाहा समाज से जिन्हें भी मंत्री बनाना हो, नीतीश कुमार बना सकते हैं, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा को नहीं। अब सवाल उठता है कि इन नेताओं की उपेंद्र कुशवाहा से इतनी नाराजगी क्यों है?

इस बैठक में उपेंद्र कुशवाहा को मंत्री नहीं बनाए जाने के निर्णय की जानकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी दे दी गई है। मतलब साफ है कि महागठबंधन की नई सरकार में उपेंद्र कुशवाहा मंत्री नहीं बनेंगे। लेकिन राजनीति में कोई भी भविष्यवाणी करना गलत होता है और अंतिम समय में कुछ भी हो सकता है। अब तो यह 16 अगस्त को भी फाइनल होगी कि उपेंद्र कुशवाहा मंत्री बनेंगे या नहीं।

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